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विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए कर्नाटक पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए उस वक्त बड़ी मुश्किलें पैदा हो गई. जब हजारों की तादात में किसान उनसे सवाल पूछने के लिए पहुँच गए. हालांकि सिर्फ पांच किसानों को अमित शाह से सवाल करने की इजाजत दी गई.

रविवार (25 फरवरी) को हुमनाबाद में किसानों के नेता ने अमित शाह से सीधा सवाल पूछा जिसमे किसानों की समस्याएं अहम थी और केंद्र सरकार इन समस्याओं से निपटने के लिए क्या कर रही है. किसान नेता सिद्धारमप्पा अनादोर ने कहा कि आपके पास कारोबारियों का 17,15,000 करोड़ रुपये का ऋण माफ करने के लिए धन है, लेकिन 12,60,000 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ करने के लिए पैसे नहीं हैं.

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इतना ही नहीं उन्होंने अमित शाह को ये भी याद दिलाया कि ये सरकार कारोबारियों के दम पर नहीं बल्कि किसानों के वोटो से बनी है. उन्होंने कहा, आपको जरूर पता होना चाहिए कि यह कारोबारियों नहीं, बल्कि किसानों का समुदाय ही था जिसने आपको सत्ता में लाने के लिए वोट दिए थे.”

इन सवालों के जवाब में अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट्स का लोन माफ नहीं किया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यह कहते हैं कि केंद्र सरकार ने किसानों का लोन माफ किया है. लेकिन हमने उनका लोन माफ नहीं किया है. हमने सिर्फ कॉर्पोरेट्स की मदद के लिए टैक्स रेट कम किया है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या सरकार किसानों का कर्ज माफ करेगी.

वहीं जब एक और किसान ने पूछा कि आखिर क्यों भाजपा ने एमएस स्वामिनाथन की रिपोर्ट को लागू नहीं किया, जब उसने चुनाव में इसे लागू करने का वायदा किया था, क्या आप अपने वायदे से मुकर गए. इसके जवाब में शाह ने कहा कि स्वामिनाथन रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है, जिसमे सबस अहम थी कि किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी मुहाया कराया जाए, जिसे पिछले बजट में सरकार ने स्वीकार कर लिया है.

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