Monday, May 17, 2021

CJI शरद बोबडे का बड़ा बयान – अंबेडकर संस्कृत को बनाना चाहते थे राष्ट्रीय भाषा

- Advertisement -

बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती पर बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद बोबड़े ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि डॉ अंबेडकर संस्कृत को राष्ट्रीय भाषा बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होने प्रस्ताव भी तैयार किया था लेकिन आगे कोई काम नही हो पाया।

नागपुर में महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होने कहा, “मैं सोच रहा था कि मुझे किस भाषा में बोलना चाहिए, मराठी या अंग्रेजी। यह दुविधा हमारे देश में लंबे समय से देखी जा रही है। मैंने इस सवाल को बार-बार देखा है कि अदालतों को किस भाषा में काम करना चाहिए। हमारे पास आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और हिंदी के साथ उच्च न्यायालय हैं। कुछ तमिल चाहते हैं, कुछ अन्य तेलुगु चाहते हैं।

मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि कोई भी इस विषय पर ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि, डॉक्टर अंबेडकर ने इसको पहले ही भांप लिया था, और एक प्रस्ताव तैयार किया था। मुझे पता नहीं है कि प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया था या नहीं। इसमें कुछ मुल्ला, पंडित और पुजारी और स्वयं डॉ. अंबेडकर के हस्ताक्षर थे। यह प्रस्ताव था कि भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा संस्कृत होनी चाहिए।”

उन्होने आगे कहा, आगे कहा, “अंबेडकर का मत था कि तमिल को उत्तर भारत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दक्षिण भारत में हिंदी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन संस्कृत का उत्तर भारत या दक्षिण भारत में विरोध नहीं किया जाएगा। इसलिए, उन्होंने यह प्रस्ताव दिया था जो सफल नहीं हुआ।

 मुख्य न्यायाधीश ने ये भी कहा, “अंबेडकर केवल कानून के विशेषज्ञ नहीं थे, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक तौर पर भी जो चल रहा था, उसे भी अच्छी तरह समझ गए थे। वह जानते थे कि लोग क्या चाहते हैं, गरीब क्या चाहते हैं। इसीलिए, मुझे लगता है, उन्होंने इस प्रस्ताव के बारे में सोचा था, लेकिन अंत में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा बना दिया गया। यह राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालय है, इसलिए आपकी अनुमति से मैं अंग्रेजी में बोलूंगा।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles