अमर्त्य सेन को मोदी की आलोचना पड़ी महँगी, नहीं मिली नालंदा विश्वविद्यालय के बोर्ड में जगह

7:24 pm Published by:-Hindi News

amrt

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करना महंगा पड़ गया हैं. सेन को नालंदा विश्वविद्यालय बोर्ड में शामिल नहीं किया गया. सेन यूनिवर्सिटी के चांसलर, गवर्निंग बोर्ड के मेंबर रह चुके हैं.

याद रहें कि कुछ दिनों पहले अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार की काफी आलोचना की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के बाद फरवरी, 2015 में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि वह गवर्निंग बॉडी के सदस्य बने रहे थे.

अमर्त्य सेन के अलावा हॉवर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और टीएमसी सांसद सुगता बोस और यूके के अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई को भी नालंदा विश्वविद्यालय के नये बोर्ड में जगह नहीं मिली हैं.

नए बोर्ड में चांसलर, वाइस चांसलर और पांच सदस्य होते हैं. इस बार ये पांच सदस्य भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाउस पीडीआर और थाईलैंड के होंगे. भारत की तरफ से पूर्व नौकरशाह एन के सिंह को चुन लिया गया हैं. वह भाजपा सदस्य और बिहार से राज्यसभा सांसद हैं.

सके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा तीन और नामों को दिया गया है. उनमें कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय के धार्मिक अध्ययन संकाय के प्रोफेसर अरविंद शर्मा, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर लोकश चंद्रा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया के नाम शामिल हैं.

खानदानी सलीक़ेदार परिवार में शादी करने के इच्छुक हैं तो पहले फ़ोटो देखें फिर अपनी पसंद के लड़के/लड़की को रिश्ता भेजें (उर्दू मॅट्रिमोनी - फ्री ) क्लिक करें