Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन से सुप्रीम कोर्ट से की CAA को रद्द करने की बड़ी मांग

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नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि नागरकिता संशोधन कानून को रद्द कर दिया जाना चाहिए. कोलकाता में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को असंवैधानिक होने के आधार पर इस कानून को रद्द कर देना चाहिए.

अमर्त्य सेन ने बेंगलुरु में इन्फोसिस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ”सरकार द्वारा बनाए गए CAA कानून को मेरी नजर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक होने के आधार पर रद्द कर दिया जाना चाहिए क्योंकि हमारे पास ऐसे मौलिक मानवाधिकार नहीं हैं जो नागरिकता को धार्मिक मतभेदों के आधार पर जोड़ते हैं”.

उन्होंने कहा, ”नागरिकता तय करने के लिए वास्तव में यह मायने रखता है कि एक व्यक्ति का जन्म कहां हुआ और एक व्यक्ति कहां रहता है”. उन्होंने कहा, “(संशोधित) कानून के बारे में पढ़ने के बाद मेरा यह मानना है कि यह संविधान के प्रावधान का उल्लंघन करता है,”.

उन्होंने ये भी कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता, संविधान सभा में चर्चा का विषय बना हुआ था, जहां यह तय किया गया कि “इस तरह के भेदभाव के उद्देश्य के लिए धर्म का उपयोग करना स्वीकार्य नहीं होगा.”

हालांकि, अमर्त्य सेन इस बात से सहमत हैं कि भारत के बाहर किसी देश में सताए जाने वाले हिंदू सहानुभूति के हकदार हैं और उनके मामलों को संज्ञान में लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ”नागरिकता को धर्म से अलग रखना चाहिए लेकिन साथ ही पीड़ित या शोषित लोगों की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए”.

JNU छात्रों का समर्थन

जवाहर लाल नेहरू के छात्रों का समर्थन करते हुए अमर्त्य सेन ने कहा है कि इस मामले में अबतक न्याय नहीं हुआ है. दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आखिर जिन लोगों को नकाबपोशों ने पीटा उन्हीं का नाम एफआईआर में कैसे जोड़ दिया गया.

हॉवर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा कि कुछ बाहरी लोग आए और उन्होंने जेएनयू के छात्रों पर हमला किया और वहां पर उत्पात मचाया, विश्वविद्यालय प्रशासन इसे नहीं रोक सका और न ही पुलिस वहां पर वक्त पर पहुंच सकी.

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