राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षकों द्वारा मुस्लिम युवक पहलू खान की हत्या करने और अन्य लोगों को बुरी तरस से पीट कर घायल करने के मामला कही से भी गौ-तस्करी से जुड़ा मामला नहीं लग रहा हैं. ऐसे में सवाल उठता हैं कि आखिर पहलू खान और उनके साथियों को निशाना क्यों बनाया गया ?

गौरक्षको के हमले में घायल हुए अजमत के बयान से स्पष्ट हैं कि जिस तरह से वसुंधरा सरकार इस मामले को गौ-तस्करी से जोड़ रही हैं. ये पूरी तरह से गलत हैं. बीबीसी बात करते हुए अजमत ने कहा कि हम डेयरी का काम करते है. कुछ गाय बिकने की वजह से हम जयपुर में भेंस खरीदने गए थे. लेकिन भेंस महंगी होने की वजह से हमारे पास एक लाख रूपए कम पड़ गए. इसलिए हमने पास में लगे सरकारी मेले से गाय खरीदने का फैसला किया. हमने वहां से गाय खरीदी और सारे कागजात बनवाकर हम गाय लेकर चल दिए.

अजमत ने बताया हमने एक हजार रूपए देकर कागजात बनवाये थे. लेकिन जैसे ही हम बहरोड़ के पास पहुंचे तभी कुछ लोगो ने हमारी गाडी पर हमला कर दिया. उन्होंने हमें गाडी से बाहर खींचा और मारपीट शुरू कर दी. उन्होंने हम सबको बड़ी बेरहमी से पीटा. वो लाठी डंडे, पत्थर , लात, घुसो से हमें मार रहे थे.  अजमत ने बताया की उन लोगो की पिटाई से वो कुछ देर में ही बेहोसी की हालत में चला गया. लेकिन उसको थोडा थोडा याद है की वो हम सबको एक जगह खींचकर ले गए और डीजल डालकर जलाने की तैयारी करने लगे. लेकिन तभी पुलिस आ गयी. मुझे रात को एक बजे होश आया तो मैंने अपने आप को पड़ोस के ही कैलाश अस्पताल में भर्ती पाया.

ध्यान देने योग्य बात ये हैं कि कथित गौरक्षकों ने ड्राइवर को सुरक्षित जाने दिया गया. दरअसल ड्राईवर हिन्दू धर्म से था. ड्राईवर का नाम अर्जुन हैं. ऐसे में सवाल उठता हैं कि अगर ये मामला गौ-तस्करी का था तो फिर ड्राईवर अर्जुन को वहां से क्यों जाने दिया गया? और दूसरा बड़ा सवाल ये हैं कि दुधारू गाय की खरीद और उसे ले जाने के पूरी कागजात होने के बावजूद पहलू खान और उनके साथियों से मारपीट क्यों की गई? तीसरा सवाल ये उठता हैं कि ये साबित हो जाने के बावजूद गायों को डेयरी उद्योग के लिए ले जाया जा रहा था फिर क्यों पीड़ितों पर गौ-तस्करी का मामला दर्ज किया गया ?

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