• एमएसओ का सिविल सेवा परीक्षा में मदरसा से पढे शाहिद रज़ा की सफलता पर कार्यकर्म
  • चयनित अभ्यर्थी शाहिद रज़ा ने मेहनत और भरोसे का बताया ज़रूरी

नई दिल्ली, 17 अप्रैल। भारत में मुसलमानों के लिए सभी अवसर खुले हुए हैं और सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का उसे लाभ उठाना चाहिए। इस संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल परीक्षार्थियों में मुसलमानों की बढ़ती संख्या प्रसन्नता की बात है और इसे प्राप्त करने के लिए युवाओं को और प्रयास करना चाहिए। यह बात चयनित अभ्यर्थी शाहिद रज़ा ने यहाँ आयोजित मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के कार्यक्रम में कही। एमएसओ ने आईएएस की परीक्षा में सफल मुस्लिम अभ्यर्थियों के सम्मान में यह कार्यक्रम आयोजित किया था। शाहिद रज़ा पहले अभ्यर्थी है जिनहोने मदरसा से शिक्षा लेने के बाद संघ लीक सेवा आयोग की परीक्षा को उत्तीर्ण किया है।

संघ लोक सेवा आयोग की इस बार की परीक्षा में 751वीं रैंक पर सफल अभ्यर्थी शाहिद रज़ा ने अपनी सफलता के लिए सूफ़िज़्म एवं मेहनत को श्रेय दिया। उन्होंने कहाकि गांव और शहर की दूरी के आधार पर फैलाई जा रही किसी भी भ्रम से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहाकि जो भी इस परीक्षा की तैयारी कर रहा है उसे डिजिटल इंडिया की पहल का लाभ उठाते हुए सूचना तक अपनी पहुंच आसान बनानी चाहिए, अपनी जीवनशैली के आधार पर टाइम टेबल बनाना चाहिए और पूरी मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने इसे भ्रम बताया कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास नहीं की जा सकती।

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एमएसओ के दिल्ली प्रदेश के महासचिव साकिब बरकाती ने कहाकि भारत का मुसलमान बहुत बड़ा राष्ट्रप्रेमी है। इसकी मिसाल यह है कि वह बंटवारे के बाद भी भारत में ही रुका। उन्होंने कहाकि 1971 के बाद भारत में मुस्लिम समाज ने अपने नज़रिये को बदला है और इसी के तहत उसकी तैयारियों का नतीजा है कि अब उसकी नौकरशाही और समाजसेवा में क़द बढ़ा है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से इसी तरह मेहनत करने और देश की सेवा के लिए तत्पर रहने की अपील की।

इस अवसर पर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के जामिया यूनिट के अध्यक्ष शकील ने कहाकि इस्लाम की सिविल सेवा का कार्य सूफ़ी संतों ने किया है और किसी भी समुदाय में सेवा का बहुत महत्व है। यदि हमारे नौजवान चाहें तो मेहनत की प्रेरणा सूफ़ीवाद की शिक्षाओं में निहित है।

इस अवसर पर कौसर इमाम, सद्दाम हुसैन, तहलील रज़ा, गुलाम सरवर, मौलाना अब्दुल वाहिद, अब्दुल बारी, अरमान आली, शमीम मालिक आदि उपस्थित थे।

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