Monday, September 27, 2021

 

 

 

J&K पर पाबंदी के सभी फैसले हो सार्वजनिक, इंटरनेट को किया जाए बहाल: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में संचार माध्यम, इंटरनेट और कई दूसरे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन जजों की बेंच ने पाबंदी के सभी फैसले को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार इंटरनेट पर पाबंदी, धारा 144, ट्रैवल पर रोक से जुड़े सभी आदेशों को पब्लिश करना होगा। इसके साथ ही 7 दिन के अंदर इन फैसलों का रिव्यू करने का आदेश दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है, बेहद जरूरी हालात में ही इंटरनेट को बंद किया जा सकता है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि नागरिक अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। आप बेवजह इंटरनेट पर रोक नहीं लगा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि सात दिनों के भीतर धारा 144 की समीक्षा की जानी चाहिेए।

बकौल कोर्ट, “इसमें कोई दोराय नहीं है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी बेहद अहम चीज है। बोलने की आजादी से जुड़े आर्टिकल 19 (1) (ए) के तहत इंटरनेट की सुविधा संवैधानिक अधिकार है।” फैसले के दौरान कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर प्रशासन से यह भी कहा कि वह हफ्ते भर में पाबंदियों से संबंधित सभी आदेशों की समीक्षा करे।

बता दें कि जम्मू कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के सरकार के निर्णय के बाद इस राज्य में लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने ये फैसला सुनाया। केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान समाप्त करने के बाद वहां लगाए गए प्रतिबंधों को 21 नवंबर को सही ठहराया था।

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