Thursday, August 5, 2021

 

 

 

मजबूरी में मस्जिदों में अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर का किया जा सकता है इस्तेमाल: देवबंद

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मस्जिदों में अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर के इस्तेमाल को लेकर एक नई बहस शुरू हो चुकी है। बरेली के दरगाह आला हजरत ने मस्जिदों में सैनिटाइजर का इस्तेमाल न करने को कहा है। वहीं दारुल उलूम देवबंद ने देश के मौजूदा हालात और कोरोना वायरस से बचाव के लिए सैनिटाइजर के प्रयोग को सही करार दिया है।

दारुल उलूम के मुफ्तियों की खंडपीठ ने कहा है कि सैनिटाइजर में इस्तेमाल होने वाला अल्कोहल अलग किस्म का होता है, इसलिए इसके इस्तेमाल में कोई हर्ज नहीं है। कहा कि यह सभी के सुरक्षा के नजरिए से भी सही है। जबकि सामान्य हालात में अल्कोहल से बनी चीजों का छिड़काव मस्जिदों में कराना सही नहीं है।

दारुल उलूम द्वारा जारी फतवे में यह भी कहा गया कि कपड़ों या बदन पर सैनिटाइजर के छींटे पड़ जाने से कपड़े या बदन नापाक नहीं होता है। खंडपीठ ने जारी फतवे में कहा कि सब्जी और गन्ने सहित पेट्रोल एवं कोयले के साथ ही अल्कोहल से निर्मित सैनिटाइजर में भले ही अल्कोहल की मात्रा अधिक हो, इससे मस्जिदों के फर्श को सैनिटाइज किया जा सकता है। मस्जिदों में प्रवेश के दौरान या वजू के बाद इसी सैनिटाइजर से हाथ भी साफ किए जा सकते हैं।

बता दें कि बरेली के दरगाह आला हजरत की ओर से बयान दिया गया था कि अल्कोहल का इस्तेमाल गैर इस्लामिक है। इसलिए मस्जिदों में इसका इस्तेमाल नहीं हाे सकता। सुन्नी मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी ने कहा है कि इस्लाम में अल्कोहल को हराम करार दिया गया है इसलिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल मस्जिदों में न किया जाए। मस्जिद अल्लाह का घर है उसे नापाक न होने दें।

फारूकी ने बुधवार को कहा, ‘इस्लाम में शराब पर पाबंदी है. मुसलमानों को अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग नहीं करना चाहिए। अगर परिसर में सफाई के लिए अल्कोहल-बेस्ड सेनिटाइजर का उपयोग किया जाता है तो इससे मस्जिद नापाक हो जाएगी। हम अल्लाह के घर को नापाक नहीं बना सकते। नमाज किसी नापाक जगह पर अदा नहीं की जा सकती। अगर मस्जिद को जानबूझकर नापाक किया जाता है तो यह गुनाह होगा। मैंने मस्जिदों और मस्जिदों की कमेटी के इमामों से अपील की है कि वे अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने से परहेज करें।’

मुफ्ती नश्तर फारूकी ने अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का एक विकल्प भी दिया है। उन्होंने कहा, ‘अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग करने के बजाय मुसलमानों को अपने हाथों और मस्जिद परिसर की सफाई साबुन, डिटर्जेंट पाउडर और शैंपू से करनी चाहिए।’

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