Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

आला हजरत के पैगाम पर होता अमल तो सीरिया, ईराक का ऐसा हाल नहीं होता…

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बरेली। उर्स ए रज़वी के तीसरे व आखिरी दिन आज आला हजरत फ़ाज़िले बरेलवी के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई इसके साथ ही उर्स का समापन हो गया। कुल शरीफ की रस्म में लाखों की तादात में जायरीन ने हिस्सा लिया।

दोपहर 2:38 पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। कारी रिज़वान रज़ा, कारी अमीर हमजा, कारी रज़ा ए रसूल ने फातिहा व मौलाना मुख्तार बहेडवी ने शज़रा पढ़ा। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन अहसन मियां ने मुल्क में अम्न चैन और मिल्ल्त की खुशहाली के लिए दुआ की। सबसे आखिर में दरगाह प्रमुख सुब्हानी मिया से काफी तादात में लोग मुरीद हुए ।

इस दौरान इंग्लैंड के फरोग-उल-कादरी ने कहा कि वहाबियत आज के दौर का सबसे बड़ा फितना है। अगर मुसलमानों ने आला हजरत के पैगाम पर अमल किया होता तो सीरिया, ईराक या अन्य मुस्लिम देशों का यह हाल नहीं होता। बोले, सऊदी अरब को आज ईरान, अमेरिका से नहीं, बल्कि बरेली से खतरा है। इमाम अहमद रजा के फतवों से डर है।

उन्होने कहा, खानकाहों और दर्सगाहों का जो वकार आज कायम है, वह आला हजरत की देन है। आला हजरत सिर्फ हिंदुस्तान के इमाम नहीं बल्कि सारी दुनिया के सुन्नी मुसलमानों के इमाम हैं। इंग्लैंड के मुस्लिम स्कॉलर मौलाना कमरुज्जमा आजमी ने कहा कि दुनिया की सभी यूनिवर्सिटी में आला हजरत पर पीएचडी की जा रही है। कारी जिक्रउल्ला ने कहा कि आला हजरत ने अपने फतवों को पैगंबरे इस्लाम का अतिया बताया।

इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और उर्स प्रभारी सैयद आसिफ मियां की देखरेख में कुल का जलसा आयोजित किया गया। इसमें आला हजरत के पीरखाना खानकाह बरकातिया मारहरा शरीफ के सज्जादगान सैयद अमीन मियां और रफीक-ए-मिल्लत सैयद नजीब की मियां की मौजूदगी खास रही।

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