कथित तौर पर गौरक्षा के नाम पर मंदिर के लाउड स्पीकर से बीफ की अफवाह फैलाकर दादरी के बिसाहड़ा गांव में की गई मोहम्‍मद अखलाक की हत्या को तीन साल का अरसा गुजर चुका है। लेकिन आज भी परिवार के जख्म गहरे है।अखलाक के परिवार का कहना है कि वह दोबारा यहां नहीं आ सकते। परिवार अभी भी उस सदमे से उबर नहीं सका है।

अखलाक का मामला फास्‍ट-ट्रैक कोर्ट में है। मामला दर्ज होने के बाद से 45 सुनवाइयां हो चुकी हैं, मगर ट्रायल नहीं शुरू हो सका है क्‍योंकि नगर अदालत अब तक आरोपियों के खिलाफ लगी धाराओं पर बहस कर रही है। मामले की सुनवाई कर रहे जज भी दो बार बदले जा चुके हैं।

अखलाक के छोटे भाई, मोहम्‍मद जान (50) ने कहा, ”केस अब तक शुरू भी नहीं हुआ है, खत्‍म होने का सवाल ही कहां उठता है? …आरोपियों के खिलाफ आरोप भी अभी तक तय नहीं हुए हैं जबकि यह फास्‍ट-ट्रैक कोर्ट है। तीन साल पहले पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में भी उन्‍हीं के नाम हैं जो अखलाक की बहन शाइस्‍ता ने दिए थे। इसके अलावा और लोगों (संदिग्‍धों) की पहचान और उन्‍हें गिरफ्तार करने के लिए कुछ नहीं किया गया।”

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अखलाक के बड़े बेटे मोहम्‍मद सरताज, जो वायुसेना में काम करते हैं, ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा कि वे, उनके भाई-बहन और मां मीडिया से बात करने को तैयार नहीं हैं। सरताज ने कहा, ”घटना का दर्द और उसके बाद जो हुआ, हम उस बारे में बात नहीं करना चाहते।”

सरताज (29) शाइस्‍ता (23) और उनके भाई दानिश (25) को भी भीड़ ने पीटा था। यह सभी अपनी मां इकरामां (43) और दादी असगरी (78) के साथ दिल्‍ली के सुब्रत पार्क स्थित एयरफोर्स क्‍वार्टर्स में रहते हैं क्‍योंकि उन्‍हें लगा था कि गवाह बनने से शाइस्‍ता, दानिश और इकरामां की जान खतरे में पड़ जाएगी। जान ने कहा, ”हर साल बकरीद के समय, बहुत दुख होता है। परिवार ने उस घटना के बाद से ईद नहीं मनाई है।”

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