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महात्मा गांधी के पड़पोते गोपालकृष्ण गांधी ने अपनी नई किताब ‘अबॉलिशिंग द डेथ पेनेल्टीः व्हाइ इंडिया शुड से नो टू कैपिटल पनिशमेंट में उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक को गौहत्या के आरोप में पीट-पीट कर मारे जाने को लेकर कहा कि इस तरह की घटना ऐसी मानसिकता की परिचायक है जिसमे मौत की सजा दे कर आनंद की अनुभूति होती है.

मौत की सजा पर रोक लगाने के लिए अभियान छेड़े हुए गांधी ने भारत में मौत की सजा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाये जाने की मांग की हैं. उनका मानना हैं कि ‘अपराध का जवाब अपराध से नहीं दिया जा सकता; हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता.

वे कहते हैं कि ‘फांसी या मृत्यु दंड देने से न तो आतंक में कमी आएगी और न ही औरतों के खिलाफ अपराधों में. मैं आपराधिक जांच प्रणाली के प्रति दिन-ब-दिन जागरुक होता जा रहा हूं. अपराधी के प्रति जांच अधिकारियों का रवैया दर्शाता है कि सरकार उनके साथ कैसा सलूक करती है, जो कि मेरी नजरों में तो बिल्कुल ही आदिम काल का लगता है.

गांधी का मानना है कि मृत्यु दंड खत्म करने के साथ ही सरकार को जांच तंत्र और जेल प्रणाली में भी सुधार करने की जरूरत है.


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