नौ साल पहले अजमेर स्थित हिन्दू-मुस्लिम एकता के मरकज सूफ़ी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर बम ब्लास्ट कर बेगुनाहों की जान लेने वाला खूंखार आतंकी भावेश पटेल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान भी एक मस्जिद में भी बम ब्लास्ट कर चूका हैं. इस मामलें में उसे दो साल की जेल भी हुई थी.

11 अक्टूबर को 2007 को रमज़ान के पाक महीने में दरगाह में ब्लास्ट कर लोगों की जान लेने के जुर्म में भावेश पटेल के साथ दो और भगवा आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई हैं. आतंकी देवेंद्र गुप्ता और सुनील जोशी का आरएसएस से सबंध रहा हैं.

भावेश हाजीखाना का रहने वाला हैं. मुस्लिमों से नफरत के कारण वह हाजीखाना को “हाथीखाना” कहता आया हैं. आज भी उसके घर पर “भारत माता की जय” और “हाथीखाना हिंदू युवा मंच” लिखा हुआ हैं. 2002 में मस्जिद पर हमले के बारे में स्थानीय पुलिस थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर एएफ सिंधी कहते हैं, “ गोधरा ट्रेन हादसे के बाद 28 फरवरी को भावेश पटेल और दो अन्य ने मस्जिद में बम फेंका था. लेकिन अंदर कोई नहीं होने के कारण किसी को नुकसान नहीं पहुंचा था.

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उन्होंने आगे बताया कि शक्तिशाली बम होने के कारण मस्जिद की शीशे की खिड़कियां और फर्श टूट गये थे. हमला करने के बाद भावेश को पकड़ लिया गया था लेकिन बाकी दो भाग गए. जिसके बाद वो दो साल तक जेल में रहा.

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