लखनऊ | ताजमहल पर जारी विवाद के बीच राज्य के पूर्व शहरी एवं विकास मंत्री आजम खान ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने उन सभी स्थलों को गिराने की मांग की है जो गुलामी का प्रतीक है. उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी इस विवाद में कूद पड़े है. जहाँ स्वामी ने पुरे विवाद को हिन्दू एंगल देने का प्रयास किया है वही ममता ने ब्रिटिश राज में बनी इमारतो पर बीजेपी की राय जाननी चाही है.

मंगलवार को ताजमहल विवाद पर बोलते हुए आजम खान ने कहा की मैं पहले भी कह चूका हूँ की जो भी इमारते गुलामी की निशानी है उनको गिरा देना चाहिए, चाहे फिर वह संसद भवन हो या फिर राष्ट्रपति भवन. यही नही लाल किला, क़ुतुब मीनार और ताजमहल भी गुलामी की निशानी है इनको भी ढहा देना चाहिए. बताते चले की आजम इससे पहले यह भी कह चुके है की अगर योगी ताजमहल को गिराने चलेंगे तो वह उनके साथ चलेंगे.

उधर बीजेपी सांसद सुब्रमानाय्म स्वामी ने पुरे मामले को हिन्दू एंगल देते हुए आज ट्वीट किया की राष्ट्रपति भवन और हैदराबाद हाउस आदि को कब्जे में लेना बर्बर इस्लामिक और ईसाई ताकतों पर हिंदुओं की जीत की निशानी है. वही ममता बनर्जी ने भी मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की मुझे टिप्पणी करने में भी शर्म महसूस हो रही है. यदि ताजमहल गद्दारों ने बनवाया तो फिर ब्रिटिश स्मारकों पर क्या कहेंगे?

ममता ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा की ब्रिटिश काल में बहुत सी चीजें तैयार की गईं और वे हेरिटेज हैं, हमारे राज्य में भी विक्टोरिया हाउस है और हमें उस पर गर्व है? मुझे नही मालूम की उन्होंने ताजमहल को क्यों बाहर किया, उन्होंने मुगलसराय का नाम बदल दिया, वो भारत का नाम भी बदलना चाहे तो हम कहाँ जायेंगे? भारत की ऐतिहासिक संस्कृति और हेरिटेज को खत्म करना बीजेपी का राजनीतिक अजेंडा है। यह निंदनीय है.

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