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नई दिल्ली । 2 अक्टूबर के दिन किसानो का जत्था दिल्ली की सीमा पर लाठियाँ खा रहा था। दिल्ली की ऊँची और शानदार बिल्डिंग में बैठे देश के नीतिकार किसानो को किसी भी हालत में दिल्ली में नही घुसना देना चाहते थे। आख़िर दिल्ली केवल उन्ही की जो है। वो लोग जो ये तय कर सकते है की आपके पास जो नोट है वो कब तक चलेगा तो वह यह भी तय कर सकते है की दिल्ली ( जिस पर उनका मालिकाना हक़ है) में कौन घुसेगा और कौन नही।

अहिंसा के सबसे बड़े दिन पर जिन किसानो को लाठी मारी गयी वो अपने घर तो वापिस लौट गए लेकिन वो जाते जाते यह बता गए की जनाब एक न एक दिन आपको भी हमारे घर आना है। और वो समय भी कुछ महीनो बाद आना ही है। लेकिन शायद किसानो से इन कुछ महीनो का इंतज़ार भी नही हुआ। इसलिए उन्होंने अपना संदेश हवाओ के ज़रिए भेजने का मन बना लिया।

जी हाँ, किसानो पर किए गए अत्याचार की हवाए अब दिल्ली की सीमा को पार कर गयी है। ये हवाए जनाब को चीख़ चीख़ कर कह रही है की हमें तो आपने दिल्ली में घुसने नही दिया लेकिन इन हवाओ को कैसे रोकोगे? हम बात कर रहे है जलायी जा रही पराली के धुए की। फ़िलहाल पराली के धुए ने पूरी दिल्ली को अपनी चपेट में ले लिया है। ये धुआं उन्ही किसानो के खेत से आ रहा है जिनका दिल्ली में प्रवेश वर्जित था।

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पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान जमकर अपने खेत में पराली जला रहे है। उनका कहना है की जो दिल्ली हमारी थी ही नही उसकी चिंता हम क्यों करे? हमारा खेत है, हमारी फ़सल है, हम जलाएँ या न जलाए। हमारे खेत पर किसी जनाब का हुक्म नही चलता। अब किसानो की जिद्द के आगे दिल्ली की हवा हारती दिख रही है। दिल्ली में पीछले 24 घंटे के अंदर दूषित हवा का लेवल काफ़ी बढ़ गया है।

सीपीसीबी के एयर बुलेटिन के अनुसार, गाजियाबाद में एयर इंडेक्स 332, गुरुग्राम में 325, फरीदाबाद में 306, ग्रेटर नोएडा में 281, दिल्ली में 262, नोएडा में 257 रहा। पीएम 10 की मात्रा 4 गुना तो पीएम 2.5 की मात्रा सामान्य से 3 गुना तक अधिक रही।

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