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नई दिल्ली | ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है की एक सरकारी कर्मचारी अपने विभाग के मंत्री की प्रतिबद्धता पर ही सवाल उठा दे. हाँ मंत्री को यह अधिकार प्राप्त है की वो अपने कर्मचारियों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठा सकता है. लेकिन अगर कोई कर्मचारी बड़ी मेहनत और लगन से काम करता है तो वो मंत्री जी की टिप्पणी से आहत भी हो सकता है.

ऐसा ही कुछ हुआ एयर इंडिया के पायलट के साथ. दरअसल नागरिक एवं उड्डयन मंत्री गजपति राजू ने तीन दिन पहले एयर इंडिया के पायलटों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा था की हमारे पायलटों की प्रतिबद्धता में कही तो कमी है जिस वजह से वे प्राइवेट एयरलाइन्स से पीछे है. गजपति राजू की यह प्रतिक्रिया कई पायलटों को नागवार गुजरी.

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इन्ही पायलटों में से एक शुभाशीष मजुमदार ने गजपति राजू को ख़त लिखकर सभी नेताओं की प्रतिबद्धता पर ही सवाल उठा दिए. शुभाशीष ने लिखा, ‘ एयर इंडिया का प्रतिबद्ध कर्मचारी , ईमानदार टैक्स पेयर और देश्बक्त नागरिक होने के नाते मैं आपको बताना चाहूँगा की शीतकालीन सत्र के दौरान आपके सहकर्मियों के नारों , पोस्टर और हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही पूरी तरह से ठप रही’.

शुभाशीष ने आगे लिखा, ‘ लोकसभा के करीब 92 घंटे बर्बाद हो गए. इनमे कोई काम नही हुआ. हम एयर इंडिया के कर्मचारी भी यह देखकर दुखी है की हमारे नेता अभी भी बाकी देशो के नेताओ के मुकाबले प्रतिबद्धता में बहुत पीछे है. अगर हम नेताओ और सांसदों की तरह व्यवहार करते तो हमें फटकार जरुर लगती. इसलिय देश की एयरलाइन्स के कर्मचारी के तौर पर और भारतीय नागरिक के तौर पर हम आशा करते है की हमारे नेता खुद का आत्मविश्लेषण करेंगे और एक मिसाल पेश करेंगे.

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