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सोमवार को  वाराणसी में चल रही परमधर्म संसद 1008 के दूसरे दिन योगी सरकार का विरोध देखने को मिला। संतों ने खुले में भगवान राम की मूर्ति को लगाना अनुचित करार दिया।

संसद में कहा गया कि भगवान श्रीराम हमारे आराध्य हैं। लगने वाली मूर्ति की पूजा अर्चना नहीं होगी। ऐसे में यह हमारी आस्था के खिलाफ है। धर्म संसद में यह भी कहा गया कि प्रतिमा महापुरुषों की होती। भगवान की प्रतिमा की पूजा होती। हमारी मांग है कि वहां राम मंदिर बने।

परम धर्माधीष स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भगवान की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा होती है। उसके बाद उसकी पूजा अर्चना शुरू की जाती है। इससे पहले रविवार को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, “हम ये चाहते हैं कि आराध्य राम का मंदिर सबके साथ मिलकर बनाया जाए। हम किसी के साथ राग द्वेष से नहीं बल्कि श्रद्धा के द्वारा मंदिर बनाना चाहते हैं।”

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अयोध्या की धर्मसभा पर शंकरायचार्य ने निशाना साधते हुए कहा, “अयोध्या की धर्मसभा राजनीतिक है. ये स्मारक बनाना चाहते हैं और हम उपासना गृह बनाना चाहते हैं। हम मुस्लिम विरोध के आधार पर नहीं खड़े हुए है। अयोध्या में धर्मसभा करने वाले राजनीतिक लोग हैं।”

उन्होने कहा, “कोई भी राजनीतिक पार्टी मंदिर बनाने की हैसियत में तब आएगी जब सत्तारूढ़ हो जाएगी और उसे ये शपथ लेनी पड़ेगी की हम धर्म निरपेक्ष रहेंगे ये मंदिर-मस्जिद बना ही नही सकते। हम लोगों ने कोर्ट में बात सिद्ध कर रखी है कि ये राम जन्मभूमि है। सुप्रीम कोर्ट में अभी अटका है। एक दिन मिल बैठकर विचार कर ले तो मंदिर बन जाएगा।”

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