ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल कर कहा कि वह तलाक को लेकर कुछ नियमों की अडवाइजरी जारी करेगा, जो निकाह करने वालों को मानना होगा.

पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट में दाखिल 13 पेज के हलफनामे में कहा है कि हम काजियों को परामर्श जारी कर कहेंगे कि वह निकाह के वक्त दुल्हों को तीन तलाक का रास्ता नहीं अपनाने की सलाह दें. साथ ही निकाहनामे में लड़की के कहने पर ये शर्त शामिल करवाने का ऑप्शन हो कि उसको तीन तलाक नहीं दिया जा सकता.

हलफनामे में पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सबको तलाक के उचित तरीके बताएंगे. साथ ही तीन तलाक करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने को कहा जाएगा. हालांकि इस एफिडेविट में सदियों पुरानी इस प्रथा को खत्म करने की बात नहीं कही गई है.

हलफनामे के सचिव मोहम्मद फजर्लुरहीम के अनुसार, निकाह कराते समय, निकाह कराने वाला व्यक्ति दूल्हे को सलाह देगा कि मतभेद के कारण तलाक की स्थिति उत्पन्न होने पर वह एक ही बार में तीन तलाक नहीं देगा, क्योंकि शरीयत में यह अवांछनीय परंपरा है.

अब मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हलफनामे का अवलोकन करेगी.