रविवार को अयोध्या मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की बैठक हुई। बैठक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी और उन्हें किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं है।

बोर्ड के सचिव एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमें वही जमीन चाहिए जिसके लिए हमने लड़ाई लड़ी। मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह जमीन लेना शरिया के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना कि वहां नमाज पढ़ी जाती थी जबकि गुंबद के नीचे भगवान राम के जन्मस्थान का कोई प्रमाण नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि मस्जिद की जमीन स्थानांतरित नहीं की जा सकती। वहीं, बोर्ड की बैठक के लिए अचानक से स्थान बदलने पर जिलानी ने कहा कि हम नदवा कॉलेज में ही बैठक करना चाहते थे लेकिन जिला व पुलिस प्रशासन ने हमें वहां बैठक करने से रोका और दबाव बनाया। जिससे कि ऐन वक्त पर बैठक का स्थान बदलना पड़ा। मैं जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के इस रवैये की कड़ी निंदा करता हूं।

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जिलानी ने यह भी कहा कि अयोध्या में 27 मस्जिद हैं। बात मस्जिद की नहीं है। जमीन के हक पर लड़ाई है। 30 दिन के अंदर रिव्यू फाइल करना होता है, जिसे हम कर देंगे। बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी पर जिला प्रशासन और पुलिस दबाव डाल रही है। हाजी महबूब की भी सहमति मिली है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमें मालूम है कि याचिका 100% खारिज हो जाएगी। इसके बावजूद हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। यह हमारा हक है। वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड और मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने बैठक का बहिष्कार किया।

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक पर इकबाल अंसारी ने कहा- हम हिंदुस्तान के मुसलमान हैं और हिंदुस्तान का संविधान भी मानते हैं। अयोध्या केस हिंदुस्तान का अहम फैसला था, हम अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे। जितना मेरा मकसद था, उतना मैंने किया। कोर्ट ने जो फैसला कर दिया उसे मान लो। हम पक्षकार थे और हम अब पुनर्विचार याचिका करने आगे नहीं जाएंगे। पक्षकार ज्यादा हैं। कोई क्या कर रहा है, नहीं मालूम।

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