बीजेपी के चाणक्य अमित शाह की चालों को मात देते हुए आखिर कांग्रेस नेता अहमद पटेल को राज्यसभा पहुंचने कमयाबा हो ही गए. अहमद पटेल को 44 वोट मिले. हालांकि अमित शाह और स्मृति ईरानी ने भी जीत दर्ज की है. अमित शाह को 46 और स्मृति ईरानी को भी 46 वोट मिले.’

इस दौरान चुनाव आयोग ने आधी रात को कांग्रेस की मांग स्वीकार करते हुए भाजपा के लिए क्रॉस वोटिंग करने वाले वाघेला गुट के दोनों विधायकों के वोट रद्द कर दिए. इसका मतलब यह हुआ कि इस सीट को जीतने के लिए दोनों प्रत्याशियों को 45 की तुलना में 44 वोटों की ज़रूरत रह गई थी.

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जीत के बाद अहमद पटेल ने ट्वीट किया और कहा- सत्यमेव जयते. अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा कि यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है. यह सत्ता, पैसे और स्टेट मशीनरी के दुरुपयोग की सबसे जबरदस्त हार है. मैं हर एक विधायक को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने धमकी और भाजपा के दबाव के बावजूद मेरे लिए वोट डाले. बीजेपी का व्यक्तिगत प्रतिशोध और राजनैतिक आतंकवाद का पर्दाफाश हो गया है. गुजरात के लोग इस साल के चुनाव में उन्हें सही उत्तर देंगे.

अहमद पटेल गुजरात के भरूच से आते हैं, जिनके पास भारतीय राजनीति का करीब 40 साल का अनुभव है. अहमद पटेल हमेशा से ही गांधी परिवार करीबी रहे हैं. 1985 में वे प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव भी रहे. 1985 से जनवरी 1986 तक अहमद पटेल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे. 1993 में अहमद पटेल पहली बार राज्यसभा पहुंचे.

2001 में पटेल, सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बने. 2005 और 2009 के यूपीए की जीत में पटेल का अहम योगदान माना जाता है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हर छोटे और बड़े फैसले में अहमद पटेल की ही सलाह होती है. पटेल बताते हैं, ‘मै सिर्फ सोनिया गांधी के एजेंडे पर अपनी पूरी ईमानदारी से काम करता हूं.

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