नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के किसानो का कर्ज माफ़ करने का फैसला ले लिए गया. इसी के साथ राज्य के करीब 86 लाख किसानो को राहत देते हुए एक लाख रूपए तक का कर्ज माफ़ कर दिया गया. हालाँकि पुरे देश में योगी सरकार के फैसले की सराहना हो रही है लेकिन बाकी राज्यों के लिए योगी सरकार का यह फैसला सरदर्द भी साबित हो रहा है.

जैसे ही उत्तर प्रदेश में किसानो के कर्ज माफ़ी की घोषणा हुई वैसे ही बाकी राज्यों से भी इसी तरह की आवाज उठने लगी. महाराष्ट्र से लेकर हरियाणा और पंजाब में भी किसानो के कर्ज माफ करने की मांग जोर पकड़ रही है. महाराष्ट्र में शिवसेना ने मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडनवीस से मांग की है की वो योगी आदित्यनाथ की राह पर चलकर सूबे के किसानो का कर्ज माफ़ करे.

हालाँकि शिवसेना पहले से इस तरह की मांग उठा रही है. उधर पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने योगी के निर्णय की सहराना करते हुए कहा की उन्होंने किसानो का कर्ज माफ़ कर यह साबित कर दिया की चुनावो के दौरान किया गया वादा महज एक जुमला नही था. अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए. शिवसेना ने स्पष्ट किया है की वो इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक उठाएगी.

उधर हरियाणा में विपक्षी दलों ने खट्टर सरकार से किसानो का कर्ज माफ़ करने की अपील की है. इंडियन नेशनल लोकदल और कुछ किसान संगठनों ने मांग की है हरियाणा के करीब 15 लाख किसानो का कर्ज माफ़ किया जाए. वही पंजाब की नवनिर्वाचित सरकार के ऊपर भी किसानो की कर्ज माफ़ी का दबाव बढ़ गया है. विपक्षी अकाली दल ने अमरिंदर सरकार से कहा की वो भी योगी की तरह अपनी प्रतिबद्धता दिखाए और किसानो का कर्ज माफ़ करे.

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