कानपुर | मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया. कोर्ट ने तीन तलाक को रद्द करते हुए केंद्र सरकार को छह महीने के अन्दर इस पर कानून बनाने के लिए कहा. मुस्लिम समुदाय में करीब 1400 साल से चली आ रही तीन तलाक की प्रथा खत्म होते ही देश भर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गयी. कुछ मुस्लिम संगठनों को छोड़कर लगभग सभी लोगो ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया.

उधर जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया , वैसे ही कानपुर में तीन तलाक को लेकर पहली एफआईआर दर्ज की गयी. कानपुर के स्वरूप नगर थाने में समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक गजाला लारी समेत पांच लोगो के खिलाफ दहेज़ प्रताड़ना और तीन तलाक देने की रिपोर्ट दर्ज कराई गयी. हालाँकि गजाला लारी ने सफाई देते हुए सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया. उल्टा उन्होंने पीड़ित पर उनके परिवार को बदनाम करने और मीडिया में सुर्खिया पाने का आरोप जड दिया.

हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार चेन्नई की रहने वाली सोफ़िया अहमद का निकाह 2015 में कानपुर के रहने वाले कारोबारी शारिक अराफात के साथ हुआ था. पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया की उस समय शारिक की बहन गजाला लारी देवरिया के रामपुर कारखाना से समाजवादी पार्टी की विधायक थी. आरोप है की निकाह के समय सोफिया के परिजनों ने एक बीएमडब्ल्यू कार, 10 लाख नकद और 20 लाख के गहने दिए थे.

सोफिया ने पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा की 13 अगस्त 2016 को उसके पति ने उसे नशे की हालत में तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. उसने मामले की शिकायत पुलिस में की लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव की वजह से कोई कार्यवाही नही हुई. सोफ़िया ने गजाला लारी और उसके बेटे मंजर लारी पर भी प्रताड़ना का आरोप लगाया. मामले पर सफाई देते हुए गजाला ने कहा की सोफ़िया के सभी आरोप गलत है. उल्टा हम उसे ससुराल वापिस आने के लिए कई बार कह चुके है.

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