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केंद्र सरकार की और से आज संसद में प्लास्टिक करंसी को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि प्लास्टिक करंसी नोटों की छपाई का फैसला लिया जा चुका है और इसके लिए जरूरी मटीरियल जुटाने का काम शुरू हो गया है.

वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि ‘प्लास्टिक या पॉलिस्टर की परत वाले बैंक नोटों की छपाई का फैसला लेते हुए मटीरियल की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.’ दरअसल, रिजर्व बैंक कई दिनों से प्लास्टिक करंसी नोट लाने पर विचार कर रहा है.

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प्लास्ट‍िक से बने करेंसी नोट पेपर वाले नोटों की तुलना में साफ-सुथरे होते हैं. इन्हें पॉलीमर नोट भी कहा जाता है. प्लास्ट‍िक के नोटों की औसत उम्र करीब पांच साल होती है. यानी पेपर के नोटों की तुलना में दोगुना से ज्यादा. प्लास्ट‍िक नोटों की नकल उतारना भी आसान नहीं होता है.

कैसे होते हैं प्लास्ट‍िक के नोट,

एक अध्यययन के मुताबिक पेपर वाले नोट की तुलना में प्लास्ट‍िक नोट से ग्लोबल वार्मिंग में 32 फीसदी की कमी और एनर्जी डिमांड में 30 फीसदी की कमी आती है.

प्लास्ट‍िक वाले नोटों का वजन पेपर वाले नोटों की तुलना में कम होता है. ऐसे में इनका ट्रांस्पोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन भी आसान होता है.

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