अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है. राजीव धवन ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबियत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है।

राजीव धवन ने कहा कि बाबरी केस के वकील (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) एजाज मकबूल ने मुझे बर्खास्त कर दिया है, जो जमीयत का मुकदमा देख रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना किसी डिमोर के मुझे बर्खास्तगी का पत्र भेजा गया है। उन्होंने आगे कहा कि अब वह डाली गई रिव्यु पेटिशन मामले में शामिल नहीं हैं। मुझे बताया गया है कि मदनी ने मेरी बर्खास्तगी के बारे में कहा है। मेरी तबीयत का हवाला देते हुए मुझे हटाया गया है जो कि बिल्कुल बकवास बात है।

बता दें कि राजीव धवन अयोध्या टाइटल सूट केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील थे। उन्होंने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा हालांकि फैसला सु्न्नी वक्फ बोर्ड के पक्ष में नहीं था। सु्न्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले वाले दिन ही साफ कर दिया कि वो रिव्यू पेटीशन नहीं दायर करेंगे।

ये बात अलग है कि राजीव धवन का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मुस्लिम समाज को न्याय नहीं मिला है। इस सिलसिले में जमीयत उलेमा हिंद की तरफ से सोमवार को पुनर्विचार याचिका दायर की गई। वहीं आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि 9 दिसंबर से पहले वो अर्जी दाखिल करेंगे।

जमीयत की और से पक्षकार एम सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एम सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था।

याचिका में ये भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि मंदिर बनाने को लेकर ट्रस्ट का निर्माण न करे। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1934, 1949 और 1992 में मुस्लिम समुदाय के साथ हुई ना-इंसाफी को गैरकानूनी करार दिया लेकिन उसे नजरअंदाज भी कर दिया। याचिका में कहा गया कि इस मामले में पूर्ण न्याय तभी होता जब मस्जिद का पुनर्निर्माण होगा।

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