Wednesday, October 27, 2021

 

 

 

वकालत का पेशा सुधार के लिए चीख रहा है, वकीलों को खुली छूट नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

- Advertisement -
- Advertisement -

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधि का पेशा सुधार के लिए चीख रहा है और वकीलों को खुली छूट नहीं दी जा सकती, क्योंकि न्याय का क्षेत्र एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। अदालत ने यह टिप्पणी आज की और बार परीक्षा के खिलाफ एक याचिका पर बार काउन्सिल ऑफ इंडिया से जवाब मांगा। इस परीक्षा को वकालत का लाइसेंस देने के लिए अनिवार्य बना दिया गया है।

वकालत का पेशा सुधार के लिए चीख रहा है, वकीलों को खुली छूट नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्टमुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने बीसीआई को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें 2010 की एक अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है जिसके जरिये वकीलों को ऑल इंडिया बार एक्जामिनेशन (एआईबीई) में बैठना और उसे पास करना अनिवार्य बना दिया गया है।

‘मेधा के आधार पर लोगों को शामिल होने दिया जाना चाहिए’
कोर्ट ने अब शुक्रवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई निर्धारित कर दी है। न्यायालय ने आगामी एआईबीई पर रोक नहीं लगाई। उसने कहा कि वह इसके खिलाफ नहीं है और इसका परीक्षण करेगा कि क्या अधिवक्ता अधिनियम के तहत इसकी अनुमति है। पीठ ने कहा, ‘व्यवस्था सुधार के लिए चीख रही है… अदालतों में 20 लाख से अधिक वकील हैं। इसका मतलब है कि हमारे पास पर्याप्त वकील हैं और भविष्य में मेधा के आधार पर इसमें लोगों को शामिल होने दिया जाना चाहिए।’ पीठ ने कहा, ‘यह ऐसा पेशा नहीं है जहां आपको खुली छूट दी जा सकती है।’

डॉक्टरी से की वकालत के पेशे की तुलना
पीठ ने इस पेशे की तुलना चिकित्सा के पेशे से की और कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति अक्षम है तो उसे मामले नहीं मिलेंगे और वह उन मामलों से नहीं निपट सकता है। आपको (बीसीआई) सुनिश्चित करना है कि एक कनिष्ठ वकील भी सभी तरह के मामलों से निपटने में सक्षम है।’ सुनवाई के दौरान सीजेआई ने जम्मू कश्मीर के पूर्व के प्रचलन का जिक्र किया और कहा कि एक व्यक्ति को संवैधानिक अदालतों के समक्ष दलील देने के लिए वकील बनने से पहले विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है।

‘भीड़ बढ़ेगी तो गड़बड़ियां भी बढेंगी’
सीजेआई ने कहा, ‘ऐसे विधि महाविद्यालय हैं, जहां संकाय नहीं हैं, पुस्तकालय नहीं है या जहां हाजिरी भी नहीं लगाई जाती है। मेरा मानना है कि ऐसे विधि महाविद्यालय हैं जहां आपको जाना है और फीस अदा करना है। शेष का खयाल रखा जाता है।; अदालत ने कहा, ‘इस पेशे में जितनी अधिक भीड़ बढ़ेगी, उतनी अधिक गड़बड़ियां होंगी, क्योंकि लोगों को जीना है। आपको एक तंत्र बनाना है ताकि सर्वश्रेष्ठ लोग पेशे में आएं…।’

‘रजिस्ट्रेशन से पहले वकीलों के ट्रेनिंग की व्यवस्था हो’
पीठ ने यह भी कहा कि ‘रजिस्ट्रेशन से पहले’ वकीलों के लिए पेशेवर प्रशिक्षण की पूर्व व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है। पीठ कर्नाटक निवासी आर नागभूषण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने कहा कि वह इस मामले में सहायता के लिए फली एस नरीमन जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्याय मित्र नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles