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हज कमेटी ऑफ इंडिया ने 2018 में हज पर गए देश भर के तकरीबन 1 लाख 28 हजार हाजियों को कर्जदार बना दिया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत का हवाला देकर हाजियों से अतिरिक्त हवाई खर्च की मांग की गई है। देश के हाजियों के लिए अतिरिक्त खर्च अदायगी का नोटिस जारी किया गया है।

दरअसल, जब हज यात्रा शुरू हुई थी तब डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 65 थी। लेकिन जब मामला एयरलाइंस को पेमेंट करने का आया तो डॉलर की कीमत बढ़ कर 71 रुपये के आसपास पहुंच गई। अब हज कमेटी ऑफ इंडिया ने इस बाबत 12 अक्टूबर को वेबसाइट पर एक नोटिस जारी किया है। जिसमें हाजियों से बकाया रुपए की मांग की गई है। लिहाजा हज पर गए लोग अब पांच से आठ हजार रुपए के कर्जदार हो गए हैं।

मसलन, लखनऊ से सऊदी अरब का किराया कमेटी ने 84,633.10 रुपये प्रति हाजी चुकाया गया है। जबकि हाजियों से उस वक्त 78,169 रुपये जमा कराए गए थे। अब कमेटी को 6,495 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। अब इसपर हज कमेटी ऑफ इंडिया हज यात्रा से लौटे हाजियों से पांच से साढ़े आठ हजार रुपये तक का अतिरिक्त हवाई खर्च मांग रही है।

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केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। सेट्रल हज कमेटी उस पर बुधवार को विचार करेगी। उन्होने कहा, इस संबंध में शिकायतें मिली हैं। बुधवार को हज कमेटी ऑफ इंडिया के साथ मुंबई में बैठक है। उसमें इस मसले पर चर्चा की जाएगी।

वहीं उत्तर प्रदेश में राज्यमंत्री मोहसिन रजा हाजियों से रकम वसूलने को सही नहीं मानते।  वो कहते हैं कि ये जिम्मेदारी हज कमेटी की है कि वो कैसे इस मामले को हल करती है।

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