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बारह साल पहले अपने मंगेतर के ही हाथों एसिड अटैक की शिकार हुई शबीना की जिंदगी में एक बार फिर से खुशियों की बहार आई हैं. आज शबीना का हाथ उसके मोहल्ले के ही शमशाद ने थाम कर उसे अपना हमसफर बनाया हैं. शबीना के लिये इंसाफ की लड़ाई लड़ने और सका इलाज कराने वाली स्वंयसेवी संस्था सखी ने उसकी शादी करवाई.

सखी की अध्यक्ष नीलम चतुर्वेदी ने बताया कि 2004 में जब शबीना पर तेजाब फेंका गया था पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज नही की थी बाद में महिला संगठनों के दबाव के कारण घटना के चार दिन बाद एफआईआर लिखी गयी और वसीम को गिरफ्तार किया गया.

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शबीना का चेहरा इतना झुलस चूका था कि उसके चेहरे के 8 ऑपरेशन हुए. नीलम ने बताया एसिड अटैक से शबीना के चेहरे और जिस्म पर बहुत गहरे घाव थे. घर वालों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी कि वह उसका बेहतर इलाज करवा सकें. ऐसे में सखी आगे आई. उसने कई लोगों से मदद मांगी. जिसके बाद आपरेशन हुए.

इस बीच कुछ ही दूरी पर रहने वाले मोहम्मद शमशाद को गुमसुम शबीना से प्यार हो गया. शमशाद ने शबीना से शादी करने की बात कही.चतुर्वेदी ने बताया कि जब हमने शमशाद से कारण पूछा कि वो शबीना से शादी क्यों करना चाहता है तो उसका जवाब कुछ ये था- ‘शबीना का दिल अच्छा है. चेहरा तो किसी का भी खराब हो सकता है.’

लेकिन सखी केंद्र की मैनेजमेंट को फिर भी उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ. इसलिए उन्होंने ये सारी बात उससे एक कागज़ पर लिखवा ली और गुरुवार की सुबह में शबीना के लिए जिंदगी ने एक नई किताब खोल दी, उसका निकाह मोहम्मद शमशाद से हो गया और उसके चेहरे पर आई मुस्कान एक पल के लिए भी फीकी नहीं पड़ रही थी. उसे मुस्कुराने की नई वजह जो मिल गई थी.

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