Sunday, September 26, 2021

 

 

 

सोहराबुद्दीन केस में आरोपी पुलिसकर्मी ने बताया – नेताओं से नजदीकी के लिए बनाया झूठा केस

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उदयपुर। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में मंगलवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में राजस्थान के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान, सब इंस्पेक्टर श्याम सिंह, हिमांशु सिंह, गुजरात इंस्पेक्टर बालकृष्ण चौबे, एमएल परमार, कांस्टेबल अजय, संतराम और व्यापारी राजू जीरावाला के बयान हुए। सभी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत एक ही बयान दिए कि उनके खिलाफ यह केस पूरी तरह झूठा बनाया गया है।

आईपीएस अधिकारियों ने नेताओं को खुश करने, नजदीकियां बनाने और विरोधी आईपीएस से दुश्मनी निकालने के लिए अपनी मर्जी से यह झूठा केस बनाया है। इस केस से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमें केस में झूठा फंसाया गया है। आरोपियों ने कोर्ट में कहा कि आईपीएस अधिकारियों के नेताओं को खुश करने की होड़ में उनके सभी काम करवाने में आईपीएस अधिकारियों का तो कुछ नहीं बिगड़ता, खामियाजा अधिनस्थ पुलिसकर्मी भुगतते हैं।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में दर्ज एफआईआर ही फर्जी है

इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने अदालत को बताया कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में दर्ज एफआईआर मेरी नहीं है, यह पूरी तरह फर्जी और झूठी है। मैंने कभी इस केस में रिपोर्ट या एफआईआर नहीं दी, एफआईआर गुजराती में टाइप है, जिस पर मेरे कहीं हस्ताक्षर भी नही हैं। इस केस में किसी ने मेरे नाम का गलत उपयोग किया है। मामले में दर्ज एफआईआर का मुझसे कोई संबंध नहीं है। इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान ने कोर्ट को बताया कि अनुसंधान एजेंसी ने भी मुझे इस केस में फंसाने के लिए झूठे सबूत और गवाह तैयार किए। सीबीआई ने न सिर्फ पब्लिक के झूठे गवाह तैयार किए, बल्कि उनके झूठे बयान भी लिखे।

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इसके साथ ही रहमान ने कोर्ट में बयान दर्ज करवाते हुए कहा, ‘इस केस का जो मकसद बताया जा रहा है ‘पॉलिटिकल और मॉनिटरी गेन’ उससे मेरा कोई संबंध नहीं है। इस केस में जो भी राजनेता और व्यापारी आरोपी हैं, उनसे मेरा कोई संबंध नहीं है। इसमें न तो सीआईडी और न ही सीबीआई ने निष्पक्ष जांच की। सभी ने अपने एजेंडे के तहत जांच की। सीआईडी हो या सीबीआई दोनों ने तटस्थ जांच करने की बजाय पहले वाले जांच अधिकारी को ही आरोपी बनाया।’

गौरतलब है कि खुद इन पुलिसकर्मियों ने भी गत महीनों में ट्रायल के दौरान कोर्ट में हुई पेशी में इस बात का खुलासा किया था कि सीबीआई ने इसी केस में गिरफ्तार करने की धमकी देकर और टॉर्चर कर झूठे बयान दिलवाए थे।

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