Saturday, June 19, 2021

 

 

 

तबलीगी जमात के सदस्य पर जारी कार्यवाही को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बताया कानून का दुरुपयोग

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नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को तब्लीगी जमात में शामिल होने को लेकर मोहम्मद सैद के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। मऊ निवासी मोहम्मद साद के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था।

साद के खिलाफ आरोप है कि उसने तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया, लेकिन दिल्ली से लौटने के बाद खुद को आइसोलेशन में नहीं रखा और जानबूझकर अपनी यात्रा की जानकारी छिपाई।

न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने आईपीसी की धारा 307 के तहत दायर आरोप पत्र को कानून का दुरुपयोग माना। पीठ ने कहा कि “तथ्यों पर गौर फरमाने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत दायर आरोप पत्र से प्रथम दृष्टया कानून के अधिकार का दुरुपयोग प्रतीत होता है।”

पीठ ने निर्देश दिया, “क्षेत्राधिकारी निजी हलफनामा दाखिल कर बताएं कि जांच के दौरान एकत्रित किए गए साक्ष्यों और तथ्यों से किस प्रकार से आईपीसी की धारा 307 लगाई गई। साथ ही वह आरोप पत्र में परिवर्तन के लिए दिए गए निर्देश को न्यायोचित ठहराएं।”

इससे पहले आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था।लेकिन इसके बाद इसे वापस लिया गया और “हत्या के प्रयास” के लिए आईपीसी की धारा 307 के तहत नया आरोप पत्र दाखिल किया गया।

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