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नई दिल्ली | 8 नवम्बर को नोट बंदी के एलान के समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था की अब लोगो के पास जमा कालाधन रद्दी हो गया. उस समय सरकार को उम्मीद थी की कालाधन रखने वाले अपने पैसे को ठिकाने नही लगा पाएंगे और सरकार को इससे अच्छी खासा राजस्व प्राप्त हो जायेगा. मोदी सरकार का आंकड़ा था की करीब 3 लाख करोड़ रूपए वापिस बैंकिंग सिस्टम में नही आएगा.

लेकिन सरकार की सारी उम्मीदे धूमिल होती जा रही है. 15.4 लाख करोड़ रूपए के पुराने 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर होने के बाद बैंक में करीब 90 फीसदी पैसा वापिस आ चूका है. यह सरकार के लिए काफी गंभीर स्थिति है. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 14 लाख करोड़ रूपए के पुराने नोट बैंक में वापिस आ चुके है. यह आंकड़ा सरकार को इसलिए भी परेशान कर रहा है क्योकि यह आंकड़ा करीब 10 दिन पुराना है.

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अभी पुराने नोट जमा करने के दो दिन बाकी है. पिछले 12 दिनों में और कितने पुराने नोट जमा होंगे यह तो आरबीआई का आंकड़ा ही बता पायेगा लेकिन सरकार की इस मुहीम में देश को कितना फायदा हुआ और कितना नुक्सान यह जरुर बहस का विषय होगा. हालांकि सरकार के लिए एक राहत की बात यह है की अब सरकार उन लोगो से टैक्स वसूल सकेगी जिन्होंने ढाई लाख से ज्यादा पैसे बैंक में जमा किये है.

इसके अलावा घरो में जो छोटी छोटी बचत जमा करके रखी गयी थी वो वापिस बैंकों में आ गयी. इससे देश का बैंकिंग सिस्टम और मजबूत हो गया. अब उम्मीद है की बैंक अपनी ब्याज दर कम करेगा और लोगो को अधिक लोन दे पायेगा. नोट बंदी लागु करते समय सरकार को उम्मीद थी की करीब 3 लाख करोड़ रुपये वापिस सिस्टम में नही लौट पायेंगे. अगर ऐसा होता तो आरबीआई सरकार को काफी अच्छा खासा लाभंस दे पता.

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