दिल्ली की एक अदालत ने निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए तब्लीगी जमात से जुड़े 82 बांग्लादेशी नागरिकों को आज जमानत दे दी। इससे पहले 60 मलेशियाई नागरिकों को बरी किया गया था।

जानकारी के अनुसार, इन सभी बांग्लादेशी लोगों को दस-दस हजार रुपए के निजी मुचलका भरने के बाद जमानत दी गई है। सभी आरोपियों को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। वकील अशिमा मंडवल और मंदाकिनी सिंह ने कहा कि ये सभी आरोपी शुक्रवार को अपनी बार्गेंनिंग याचिका दायर करेंगे। इस याचिका के तहत आरोपियों के कम से कम शिकायत करने की अपील करेंगे।

बता दें कि हाल ही में साकेत कोर्ट की चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने 22 विदेशी नागरिकों को दस-दस हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने 8 जुलाई को जिन देशों के 22 नागरिकों को जमानत दिया था उनमें अफगानिस्तान, ब्राजील, चीन, अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, मिस्त्र, रूस, अल्जीरिया, बेल्जियम, सउदी अरब, जॉर्डन, फ्रांस, कजाकिस्तान, मोरक्को, ट्यूनिशिया, ब्रिटेन, फिजी, सूडान, फिलीपींस और इथियोपिया के नागरिक शामिल हैं।

साकेत कोर्ट ने पिछले 7 जून को 122 मलेशियाई नागरिकों को जमानत दी थी। साकेत  कोर्ट ने 956 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दायर 59 चार्जशीट पर संज्ञान लिया और सभी विदेशी नागरिकों को नोटिस जारी कर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया। ये विदेशी नागरिक पिछले मार्च महीने में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

उल्लेखनीय है कि पिछले 2 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को सुझाव दिया था कि वो तब्लीगी जमात के विदेशी नागरिकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई करते समय उन मामलों का पहले निष्पादन करें जिनमें आरोपी अपनी गलती मान चुके हों या जिसमें समझौते की गुंजाइश हो।

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