जम्मू-कश्मीर बीते तीन सालो से अपने कठिनतम दौर से गुजर रहा है। इस बात का सबूत है पैलेट गन के इस्तेमाल की घटनाएं। जिसने हजारों लोगों को विकलांग बना दिया।

आकड़ों के अनुसार PDP-BJP वाली महबूबा सरकार के शासन मे जम्मू-कश्मीर के 10 अलग-अलग जिलों में करीब 31,085 लोग पैलेट गन का शिकार हुए। ऐसे मे शारीरिक रुप से विकलांग होने वाले लोगों की संख्या में 74 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

पिछले छह सालों में कुपवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा (10,825), अनंतनाग में (8,638) बारामूला में (7274) और पुलवामा में (5,461) लोग पैलेट गन के इस्तेमाल की वजह से लोग घायल हुए। जिसकी वजह से अलग-अलग तरह की शारीरीक परेशानियों से जूझ रहे हैं।

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2001 में राज्य में विकलांग लोगों की कुल संख्या 302,607 थी। जो 2011 में बढ़कर 3 लाख 61 हजार 153 हो गई। जिसमें 56.7 प्रतिशत पुरुष और 43.2 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। इनमे ज्यादातर लोग कान से कम सुनाई देने की समस्या से पीड़ित थे।

लेकिन 2014 में संघर्ष की वजह से 1 लाख से ज्यादा लोग शारीरीक विकलांगता के शिकार हो गए। मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज का कहना है कि साल 2016 में पैलेट गन का इस्तेमाल काफी बढ़ा है जिसकी वजह से दिव्यांगों की संख्या काफी बढ़ी है।

उन्होने बताया, 2016 में 1 हजार से ज्यादा लोगों की आंखें पैलेट गन से निकलने वाले धुएं की चपेट में आने की वजह से खराब हो गईं और अब इनके ठीक होने की उम्मीद बहुत कम है। राज्य में आंखों की रोशनी खोने वाले लोगों की संख्या में 68.9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

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