नई दिल्ली | विकास और वादों के नाम पर चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई मोदी सरकार ने पिछले दो सालो में किये गए वादों को अभी तक पूरा नही किया है. संसद की अधिकारिक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है की मोदी सरकार के मंत्रियो ने पिछले दो साल में संसद के अन्दर जो वादे किये, उनमे से करीब 30 फीसदी वादों पर ही अमल किया गया. कुछ वादे ऐसे भी रहे जिनकी फाइल अभी तक खुली भी नही.

दरअसल संसद में किसी भी चर्चा के दौरान उठाये गए मुद्दों पर सम्बंधित मंत्री जवाब देता है. ज्यादातर मुद्दों पर मंत्री बाद में जानकारी देने या विचार करने का आश्वासन देता है. इनमे से कुछ मुद्दे व्यक्तिगत होते है तो कुछ विकास से जुड़े हुए मुद्दे भी उठाये जाते है. मंत्री जी संसद में विकास कार्य कराने का वादा तो कर लेते है लेकिन इन कार्यो को पूरा कराने के लिए सम्बंधित मंत्रालयों की इजाजत लेनी पड़ती है.

इसलिए मंत्री जी के वादे , मंत्रालयों के चक्कर लगाते रहते है. कुछ फाइल तो ऐसे होती ही जिनको कभी खोल कर ही नही देखा जाता है. हालाँकि संसद में किये गए वादों को तीन महीने के अन्दर पूरा कराने की जिम्मेदारी 15 सदस्यों की संसदीय समिति के जिम्मे होती है. देर होने पर यह समिति सम्बंधित मंत्रालयों के अधिकारियो को भी तलब कर सकती है.

इतना सब होने के बावजूद , संसदीय मामलो के मंत्रालय ने मंत्रियो द्वारा किये गए वादों के बारे ने जो रिपोर्ट जारी की है वो बहुत चौकाने वाली है. इस रिपोर्ट के अनुसार जितने भी वादे संसद में किये गए उनमे से 70 फीसदी वादे अभी तक पुरे नही हुए है. इस दौरान 1877 वादे किये गए जिनमे से 552 मामले ही पुरे किये गए जबकि 893 वादे अभी भी पेंडिंग है. कमाल की बात यह है की 392 वादों की फाइल अब तक खुली भी नही है. विकास की बात करने वाली सरकार के लिए ये आंकड़े काफी चिंताजनक है.


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