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हरियाणा के पलवल में मस्जिद निर्माण की जांच कर रही एनआईए ने दावा किया कि निजामुद्दीन निवासी मोहम्मद सलमान ने पलवल की खुलाफा-ए-रशीदीन मस्जिद निर्माण के लिए 70 लाख रुपए दिए। जांच एजेंसी के मुताबिक पैसा सलमान ने कथित तौर पर लश्कर के एनजीओ फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से लिया।

मामले में एनआईए के अधिकारी ने बताया, ‘हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि पैसा और लश्कर ऑपरेटरों के संबंध सलमान से हैं। एलेक्ट्रोनिक सबूत भी हैं। जिसमें ईमेल और चैट के जरिए पता चला है कि फंड को लेकर FIF से चर्चाएं की गईं। पाकिस्तान और दुबई में ऐसे दो संचार हुए। इसके अलावा हमें पता चला है कि सलमान तीन बार पाकिस्तान जा चुका है।’

पलवल के उत्तावर गांव में खुलाफा-ए-रशीदीन मस्जिद को 3 अक्टूबर को एनआईए अधिकारियों ने खोजा था। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें टेरर फंडिंग मामले में मस्जिद के इमाम, दिल्ली से मोहम्मद सलमान को गिरफ्तार किया गया।

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हालांकि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) की एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह जाहिर हो कि आतंकवादी संगठन के धन का इस्तेमाल हरियाणा के पलवल में मस्जिद बनाने के लिए किया गया।

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मानवाधिकार कार्यकर्ता और आयोग के सलाहकार ओवैस सुल्तान के नेतृत्व में चार सदस्यीय समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि  ‘कमेटी को ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि पलवल के उत्तवार में खुलफा-ए-राशिदीन मस्जिद के निर्माण के लिए आतंकवादियों से धन मिला था।’

ओवैस ने कहा कि यह मस्जिद तबलीगी जमात से संबद्धित है जबकि लश्कर-ए-तैयबा और एफआईएफ सलाफी विचारधारा से संबद्धित है। ये दोनों एक दूसरे की शिक्षाओं और परंपराओं से सहमति नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह उनके बीच तालमेल होने का या मस्जिद के लिए धन दिए जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

कमेटी ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष से यह सिफारिश की कि वह एनआईए की जांच में हुई प्रक्रियागत चूकों के बारे में केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिख कर जानकारी दें। साथ ही, सभी मीडिया संगठनों एवं एजेंसियों को यह परामर्श जारी किया जाए कि वे कथित आतंकवाद से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में सावधानी बरतें।

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