नई दिल्ली | पूरा देश आज 68वे गणतंत्र दिवस के मौके पर जश्न में डूबा हुआ है. इस दौरान हमने दुनिया को अपनी सैन्य और सांस्कृतिक ताकत से रुबुरु कराया. राजपथ पर जब देश में निर्मित वायुयान तेजस 780 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भरता हुआ पहुंचा तो हम दुनिया को यह अहसास कराने में सफल रहे की भारत अब वायुयान के लिए किसी देश का मोहताज नही है.

ऐसे ही न जाने कितने पल राजपथ ने हर हिन्दुस्तानी को दिए जिसने हमें गौरवान्वित कर दिया. जब पहली बार एनसीजी कमांडो का दस्ता राजपथ पर परेड करता हुआ निकला तो दुश्मनों को इस बात का अहसास हो गया की इस देश को नुक्सान पहुँचाना अब इतना आसान नही है. सैन्य ताकत के अलावा परेड में हिस्सा ले रहे विदेशी मेहमानों को देश की सांस्कृतिक विरासत को देखने का भी मौका मिला.

आज सुबह जैसे ही गणतंत्र दिवस की परेड शुरू हुए, तभी बूंदाबांदी शुरू हो गयी. एक बारगी ऐसा लगा जैसे भारत के सैन्य कौशल को देखने के लिए ऊपर वाले ने भी अपने कपाट खोल दिए है. परेड में आर्मी की सबसे बड़ी ताकत के तौर पर जाने जाने वाले टी 90 भीषम बैटल टैंक ने जलवे बिखेरे. इस दल की अगुवाई लेफ्टिनेंट विशेष तिवारी ने की. यह टैंक आधुनिक तकनीक से विकसित है. इसमें थर्मल इमेजिंग सिस्टम और इंटीग्रेटेड फायर कण्ट्रोल सिस्टम जैसी तकनीक मौजूद है जो किसी भी दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए काफी है.

भीष्म टैंक के बाद ब्रह्मोस मिसाइल वेपन सिस्टम के ऑटोनोमस लांचर को राजपथ पर प्रदर्शित किया गया. इस वेपन को 861 मिसाइल रेजिमेंट ने प्रदर्शित किया. इस मिसाइल को भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया. यह मिसाइल 290 किलोमीटर तक वार करने में सक्षम है. धनुष गन सिस्टम , जो दुनिया में सबसे उत्तम गन सिस्टम में से एक मानी जाती है, को भी राज पथ पर प्रदर्शित किया गया. धनुष गन सिस्टम को भी पूरी तरह भारत में ही विकसित किया गया है.


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