Thursday, January 20, 2022

65 वर्षीय कश्मीरी बुजुर्ग की यूपी की जेल में मौत, पीएसए के तहत किया था कैद

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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा आर्टिकल 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में कठोर जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लेकर यूपी की जेल में भेजे गए कश्मीर के जमात-ए-इस्‍लामी कार्यकर्ता की जेल में मौत हो गई।

जमात-ए-इस्लाम के सदस्य रहे गुलाम मोहम्मद भट (72) को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सक्रिय सदस्य भट पर पीएसए लगाया था, जो अगले साल नौ जनवरी को खत्म होना था।

उन्होंने कहा कि भट्ट कई बीमारियों से जूझ रहा था और शनिवार शाम चार बजे नैनी केन्द्रीय कारागार में उसने अंतिम सांस ली। उसके शव को विमान से यहां लाया गया और दफनाने के लिए परिवार को सौंप दिया गया। भट के खिलाफ आतंकवाद-रोधी कानून, गैरकानूनी (गतिविधियां) रोकथाम अधिनियम समेत कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दो मामले दर्ज थे। इनमें से एक मामला 2016 का और एक मामला इसी साल का है।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर घटना की निंदा करते हुए लिखा गया कि भट हिरासत में लिए गए पहले ऐसे कश्मीरी नेता हैं, जिनकी कश्मीर से बाहर किसी जेल में मौत हुई। “गृह मंत्रालय के हाथ खून में सने हुए हैं और इसके लिए उसे जवाब देना होगा।” महबूबा का ट्विटर अकाउंट उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती देख रही हैं।

पीएसए के तहत हिरासत में लिये गए लगभग 300 राजनीतिक नेताओं को पांच अगस्त के बाद कश्मीर घाटी से बाहर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की जेलों में बंद कर दिया गया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर भी पीएसए लगाया गया है, जो लोकसभा के मौजूदा सदस्य हैं। उन्हें उनके घर में रखा गया है। महबूबा मुफ्ती के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी पांच अगस्त के बाद से एहतियातन हिरासत में रखा गया है।

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