नई दिल्ली | म्यांमार में चल रही हिंसा के बीच काफी रोहिंग्या शर्णार्थियो ने भारत में पनाह ली हुई है. कई हजार रोहिंग्या शरणार्थी करीब पांच साल से हमारे देश में रह रहे है. इनमें से लगभग सभी के पास संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र भी है. लेकिन अब केंद्र सरकार ने सभी शर्णार्थियो को वापिस म्यांमार भेजने का फैसला किया है. मोदी सरकार का तर्क है की रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा है.

सरकार के इस फैसले के खिलाफ काफी लोग खुलकर सामने आये है. सोशल मीडिया पर भी काफी लोग सरकार के इस फैसले की आलोचना कर रहे है. खुद बीजेपी सांसद वरुण गाँधी भी यह नही चाहते की रोहिंग्या शर्णार्थियो को वापिस उनके देश भेजा जाए. लेकिन सब दलीलों और आलोचनाओं को दरनिकार करते हुए मोदी सरकार ने अपने कदम पीछे हटाने से इनकार कर दिया है. लेकिन अभी भी कुछ लोगो ने हार नही मानी है.

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न्यूज़ एजेंसी भाषा के अनुसार अपने अपने क्षेत्र की करीब 51 प्रतिष्ठित हस्तियों ने मिलकर प्रधानमंत्री मोदी को एक खुला ख़त लिखा है. ख़त के जरिये अपील की गयी है की रोहिंग्या शर्णार्थियो को वापिस न भेजा जाए. पत्र लिखने वालो में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम, शशि थरूर, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लै और अभिनेत्री स्वरा भास्कर शामिल है. यह ख़त गुरुवार को लिखा गया. इसके अलावा ख़त में सरकार की उस थ्योरी पर भी सवाल खड़े किये जिसमे रोहिंग्या को देश के लिए खतरा बताया गया.

ख़त में लिखा गया की संविधान का अनुच्छेद-21 सभी लोगों को जीने के अधिकार की गारंटी देता है, भले ही उसकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो तथा सरकार जोखिम का सामना कर रहे विदेशी नागरिकों के समूहों की रक्षा के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है. एक उभरते वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत अदूरदर्शी दृष्टिकोण नहीं अपना सकता. भारत का यह तर्क की सभी रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा है एक गलत धारणा है.

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