आगरा | उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी हर संभव प्रयास कर रही है. कभी परिवर्तन रैली के जरिये वह लोगो को अखिलेश सरकार की खामियों बताती है तो कभी चौपाल के बहाने किसानो को साधने की कोशिश करते है. हालांकि यह तो 11 मार्च को ही पता चलेगा की बीजेपी अपने प्रयास में कितना सफल रही लेकिन बीजेपी नेताओ की सभाओ में जुट रही भीड़ पार्टी के माथे पर बल जरुर डाल रही है.

पुरे देश में किसान मोदी सरकार से काफी खफा दिखाई देते है. लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने किसानो से वादा किया था की सरकार बनने पर वह फसलो के समर्थन मूल्य में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करेंगे लेकिन पिछले ढाई सालो में किसानो को उनकी फसल का दाम पहले की मुकाबले काफी कम मिल रहा है. इसके अलावा कर्जे की वजह से देशभर में काफी किसानो ने आत्महत्या की है जो सरकार के लिए चिंता का विषय है.

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नोट बंदी की वजह से भी किसानो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. इन्ही सब बातो से चिंतित बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में चौपाल सभा का आयोजन करने का फैसला किया. इस चौपाल सभा के जरिये बीजेपी किसानो को यह बताना चाहती है की मोदी सरकार ने किसानो के लिए काफी योजनाये शुरू की है. इसके लिए केन्द्रीय मंत्रियो को जिम्मेदारी सौपी गयी है की वो इन चौपाल सभा में जाकर किसानो को बताये की कैसे वो इन योजनाओं का लाभ ले सकते है.

ऐसे ही एक चौपाल सभा आगरा में आयोजित की गयी. इस चौपाल सभा में केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को आना था. बीजेपी को उम्मीद थी की इस सभा में करीब 5000 किसान जुटेंगे. इसी हिसाब से तैयारी भी की गयी थी लेकिन बीजेपी को उस समय काफी धक्का लगा जब सभा में 50 किसान भी नही पहुंचे. किसानो के न पहुँचने की वजह से गिरिराज सिंह ने अपना कार्यकर्म रद्द कर दिया. शायद बीजेपी को भी अहसास हो गया की किसानो में मोदी सरकार और बीजेपी के लिए काफी गुस्सा है.

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