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नई दिल्ली | 8 नवम्बर को जब प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी की घोषणा की थी तब कहा गया था की यह कदम भ्रष्टाचार और कालेधन को खत्म करने में मददगार साबित होगा. लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ. अभी तक 12 लाख करोड़ रूपए से ज्यादा बैंकों में जमा हो चुके है. अभी 22 दिन बचे है और करीब 2 लाख करोड़ रूपए बाहर है. उधर कालेधन को सफ़ेद करने की कालाबाजारी भी खूब फलफूल रही है. एक ऐसी ही कालाबाजारी राजनितिक पार्टिया भी कर रही है.

चौंकिए मत , हम उन राजनितिक पार्टियों की बात नही कर रहे है जिनको आप जानते है और वोट देते है. वैसे देश की ज्यादातर राजनितिक पार्टिया अज्ञात श्रोतो से चंदा लेती है जो संभवतः कालाधन हो सकता है. देश की दोनों राष्ट्रिय पार्टिया कांग्रेस और बीजेपी , खुद को आरटीआई के अधीन लाने के पक्ष में नही है. चलिए खबर पर आते है. चुनाव आयोग ने एक चौकाने वाला खुलासा किया है.

मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी के अनुसार देश में करीब 1900 रजिस्टर्ड राजनितिक पार्टिया है. लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है की इनमे से 400 पार्टियों ने कभी चुनाव ही नही लड़ा. चुनाव आयोग को शक है की इन पार्टियों का इस्तेमाल कालेधन को सफ़ेद करने में हो रहा है. नसीम जैदी ने बताया की हम ऐसी पार्टियों की स्क्रूटनी कर रहे है.

नसीम जैदी के कहा की जिन पार्टियों ने अभी तक चुनाव नही लड़ा है उनकी डिटेल राज्य चुनाव आयोग से मंगाई जा रही है. इसके अलावा इन पार्टियों को मिल रहे फंड की जानकारी भी मुहैया कराने का भी आदेश दिया गया है. ऐसी पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और इनको आयकर और चंदे में मिलने वाली छूट को भी हटाया जाएगा. नसीम जैदी ने बताया की ऐसी पार्टियों का दोबारा रजिस्ट्रेशन करने में एक लम्बी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है.


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