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असम में नागरिकता के सबंध में जारी हुए नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) ड्राफ्ट दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब एक बार फिर से ये सुर्खियों में है। विदेशियों की पहचान के सबंध में बनाए गए इस ड्राफ्ट में खुद विदेशी शामिल कर लिए गए।

मीडिया रेपोर्टों में एनआरसी की लिस्ट में 39 ‘विदेशी’ परिवारों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। मोरीगांव जिले के डेप्युटी कमिश्नर हेमन दास ने कहा, ‘विदेशी घोषित हो चुके करीब 39 परिवार एनआरसी की लिस्ट में शामिल कर लिए गए हैं। हम यह आश्वस्त करेंगे कि फाइनल लिस्ट में से उनके नामों को हटा दिया जाए।’

गौरतलब है कि 30 जुलाई को सरकार की और से जारी ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ आवेदकों का नाम ही शामिल था। बाकी के 40 लाख लोगों को इस लिस्ट से बाहर रखा गया। इन 40 लाख लोगों की नागरिकता को कथित तौर पर अवैध बताया जा रहा है।

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हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंहने कहा है कि इस ड्राफ्ट में जिन लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं उनको दावा करने का पर्याप्त मौका दिया जाएगा। केंद्र ने कहा कि इस मसले पर बिना वजह माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जो सही नहीं है।

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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राज्य सभा में अपने बयान में कहा, ‘ यह फाइनल ड्राफ्ट है न कि फाइनल एनआरसी। 24 मार्च 1971 के पहले से राज्य में रह रहे व्यक्तियों के नाम इसमें शामिल किया गया है। जिन लोगों के पास लैंड रिकॉर्ड, पासपोर्ट, बीमा पॉलिसी थी उनका नाम भी एनआरसी में शामिल किया गया है। जिनके पास जरूरी दस्तावेज है उनका नाम नहीं छूटेगा। अन्य राज्यों के नागरिक जो असम में रह रहे हैं वह भी 1971 के पहले का देश में कहीं का सर्टिफिकेट दिखाने पर एनआरसी में शामिल किए जाने के योग्य माने जाएंगे।’

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 1985 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी के समय शुरू हुई थी। एनआरसी को अपडेट करने का फैसला 2005 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल में किया गया था।

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