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राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मसौदे से बाहर किए गए 40 लाख लोगों में से 35.5 लाख से अधिक लोग एनआरसी में नाम शामिल कराने के लिए अब तक आवेदन नहीं कर पाए है। अब तक करीब 4.5 लाख लोगों ने एनआरसी में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन जमा किया है और उन्होंने उन्हें उचित दस्तावेज भी सौंपे हैं।

जानकारी के अनुसार, 200 से भी कम ऐसे आवेदन मिले हैं जिनमें एनआरसी में संदिग्ध अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल होने को चुनौती दी गई है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद दावें और आपत्तियां जमा कराने की प्रक्रिया 25 सितम्बर को शुरू हुई थी और यह प्रक्रिया 15 दिसम्बर को समाप्त होगी।

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एनआरसी में नाम जुड़वाने के लिए कम दावों के मुद्दे पर शनिवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी। इसमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा, खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव जैन सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

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इससे पहले वर्ष 1971 से पूर्व असम आने वाले वैसे भारतीय नागरिकों को एनआरसी में शामिल करने की भी घोषणा की गई, अगर उनके दावे और आपत्तियों के निस्तारण के दौरान ऐसे लोगों की नागरिकता का निर्धारण निस्संदेह तरीके से हो जाता है।

यह मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का हिस्सा है, जिसे राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के प्रदेश समन्वयक प्रतीक हजेला ने उच्चतम न्यायालय को सौंपा है। उच्चतम न्यायालय ने एनआरसी में नामों को शामिल करने के लिए दावा और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 15 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है।

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