Thursday, January 27, 2022

मोदी सरकार बेंकिंग सेक्टर का बुरा हाल, सरकारी बैंकों की 3400 शाखा हुई खत्म

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जनधन योजना के तहत गांव-गांव में बेंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने वाली मोदी सरकार के शासन में बीते पांच वित्तीय वर्षों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के 26 सरकारी बैंकों की कुल 3,427 बैंक शाखाओं का मूल अस्तित्व प्रभावित हुआ है।

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से 75 प्रतिशत शाखाएं देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की प्रभावित हुई हैं। देश के 26 सरकारी बैंकों की वित्तीय वर्ष 2014-15 में 90 शाखाएं, 2015-16 में 126 शाखाएं, 2016-17 में 253 शाखाएं, 2017-18 में 2,083 बैंक शाखाएं और 2018-19 में 875 शाखाएं या तो बंद कर दी गयीं या इन्हें दूसरी बैंक शाखाओं में विलीय कर दिया गया।

आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि आरटीआई अर्जी पर मिले जवाब के अनुसार बीते पांच वित्तीय वर्षों में विलय या बंद होने से एसबीआई की सर्वाधिक 2,568 बैंक शाखाएं प्रभावित हुईं।

आरबीआई ने बताया कि स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के साथ भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक आॅफ हैदराबाद, स्टेट बैंक आॅफ मैसूर, स्टेट बैंक आॅफ पटियाला और स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर का विलय एक अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ था। इसके अलावा, बैंक आॅफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय एक अप्रैल 2019 से अमल में आया था।

मामले में अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने “पीटीआई-भाषा” से कहा, “अगर सरकार देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाती है, तो इन बैंकों की कम से कम 7,000 शाखाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें से अधिकांश शाखाएं महानगरों और शहरों की होंगी।”

 वेंकटचलम ने आशंका जतायी कि प्रस्तावित विलय के बाद संबंधित सरकारी बैंकों का कारोबार घटेगा, क्योंकि आमतौर पर देखा गया है कि किसी बैंक शाखा के बंद होने या इसके किसी अन्य शाखा में विलीन होने के बाद ग्राहकों का उससे आत्मीय जुड़ाव समाप्त हो जाता है।

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