शीर्ष अदालत में दाखिल करने के करीब एक साल बाद खोली गई कमेटी की रिपोर्ट में समीर खान, कासम जाफर और हाजी हाजी इस्माइल की मुठभेड़ में मौत को प्रथम दृष्टया फर्जी माना है। हालांकि उन्होंने इन मुठभेड़ में आईपीएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर कोई सिफारिश नहीं की है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बेदी को गुजरात में 2002 से 2006 के बीच मुठभेड़ के 17 मामलों की जांच करने वाली निगरानी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। समिति ने पिछले वर्ष फरवरी में शीर्ष अदालत में लिफाफाबंद रिपोर्ट सौंपी थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने नौ जनवरी को गुजरात सरकार की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने समिति की अंतिम रिपोर्ट पर गोपनीयता बनाए रखने की मांग की थी। पीठ ने आदेश दिए कि इसे याचिकाकर्ताओं को मुहैया कराया जाए जिसमें कवि और गीतकार जावेद अख्तर भी शामिल हैं। कमेटी ने समीर खान के परिजनों को 10 लाख रुपये और कासम जाफर के परिजनों को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने के भी सिफारिश की है। इन तीन मुठभेड़ पर सवाल 22 अक्तूबर, 2002 को समीर खान का अहमदाबाद के उस्मानपुरा में पुलिस हिरासत से भागते समय एनकाउंटर 13  अप्रैल, 2006 को कासम जाफर अहमदाबाद में पुलिस हिरासत से फरार हुआ, एक दिन बाद लाश मिली 09 अक्तूबर, 2005 को हाजी हाजी इस्माइल ने पुलिस के रोकने पर फायर किया, बदले में पुलिस ने 20 गोली मारी इन 14 एनकाउंटरों की भी जांच मिथु उमर दाफेर, अनिल बिपिन मिश्रा, महेश, राजेश्वर कश्यप, हरपाल सिंह ढाका, सलीम गाजी मियाना, जाला पोपट देवीपूजक, रफीक शाह, भीमा मांडा मेर, जोगिंदर खेतान सिंह, गणेश खुंटे, महेंद्र जाधव, सुभाष भाष्कर नैय्यर और संजय।

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