सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्ष के दौरान देश के 10 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के 27 विद्यार्थियों ने आत्मह’त्या की है। देश भर में फिलहाल 23 आईआईटी चल रहे हैं।

मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को बताया कि उन्हें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मिली है। गौड़ की आरटीआई अर्जी पर दो दिसंबर को भेजे जवाब में बताया गया कि इस दौरान कितने छात्रों ने खुदकुशी की।

जवाब में बताया गया कि वर्ष 2014 से 2019 के बीच आईआईटी मद्रास के सात, आईआईटी खड़गपुर के पांच और आईआईटी दिल्ली और आईआईटी हैदराबाद के तीन-तीन विद्यार्थियों ने आत्महत्या की।पिछले पांच वर्षों में आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी रुड़की के दो-दो विद्यार्थियों ने खुदकुशी की। इस अवधि में आईआईटी कानपुर, वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू और आईआईटी (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस) धनबाद के एक-एक विद्यार्थी ने जान दी।

आईआईटी विद्यार्थियों की आत्महत्या के कारणों के बारे में आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया गया। देश के आईआईटी संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की घटनाएं रोकने के प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर आरटीआई कार्यकर्ता को बताया गया कि इन शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं की शिकायतों पर जांच के बाद कार्रवाई के तंत्र बनाये गये हैं। इनमें विद्यार्थी शिकायत शाखा, अनुशासन समिति, परामर्श केंद्र आदि शामिल हैं।

इस बीच ‘सुपर 30’ के संस्थापक आनंद कुमार ने शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र-छात्राओं की आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताई है। आनंद कुमार ने सुझाव दिया कि आईआईटी संस्थानों में विद्यार्थियों की तादाद के अनुपात में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता होनी चाहिए। गैर अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में पढ़कर आईआईटी पहुंचे छात्रों के लिए अंग्रेजी की विशेष कक्षाएं शुरू की जानी चाहिए, ताकि उन्हें पढ़ाई में मदद मिल सके।

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