Sunday, October 24, 2021

 

 

 

40 सालों में जीडीपी में सबसे बड़ी गिरावट, 23.9 फीसदी गिरी

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भारत के सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी की विकास दर को बड़ा झटका लगा है। सोमवार को लॉकडाउन तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 के जीडीपी आंकड़े जारी किए। जिसके अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ रेट -23.9 फीसदी दर्ज की गई।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.2 फीसदी रही थी। एनएसओ द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पहली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वृद्धि दर (सकल मूल्य वर्धन या जीवीए) 39.3 फीसदी की गिरावट, निर्माण क्षेत्र में 50.3 फीसदी की गिरावट, उद्योग में 38.1 फीसदी की गिरावट, खनन क्षेत्र में 23.3 प्रतिशत की गिरावट और सेवा क्षेत्र में 20.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।

वहीं स्टील सेक्टर में गिरावट -16.4%, सीमेंट में 13.5% और पेट्रोलियम रिफाइनरी प्रोडक्शन में 13.9% तक गिरावट दर्ज़ की गयी है। आंकड़ों के अनुसार, बिजली, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य उपयोगी सेवाओं में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा व्यापार, होटल, यातायात, संचार और प्रसारण से जुड़ीं अन्य सेवाओं में 47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि जून तिमाही में सिर्फ कृषि, वानिकी और मत्स्य उद्योग में विकास दर्ज की गई है. तीनों क्षेत्र 3.4 प्रतिशत वृद्धि दर के गवाह रहे हैं। जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले अधिक है। वित्त वर्ष 2019-20 की इस अवधि में इन तीनों क्षेत्रों की वृद्धि दर 3.0 प्रतिशत रही थी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार के. वी. सुब्रहमणियन का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 23.9 फीसदी की गिरावट का मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण रोकने के लिए लगाया गया कड़ा लॉकडाउन है। आने वाली तिमाहियों में देश बेहतर प्रदर्शन करेगा। सुब्रहमणियन ने कहा कि बिजली उपभोग और रेल मालवहन जैसे संकेत दिखा रहे हैं कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार हो रहा है।

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