लखनऊ. उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 20 और 21 दिसंबर 2019 को 22 लोगों की मौत हुई और 83 लोग घायल हुए थे। इसके साथ ही  करीब 883 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 561 को जमानत मिल चुकी है और 322 अब भी जेल में हैं।

प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने 17 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी। जिसमे उन्होने दावा किया कि हिंसा के दौरान 45 पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हुए घायल थे। उन्होंने घायलों की सूची भी प्रस्तुत की।

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार दोनों को ही अपने हलफनामे और दस्तावेज दाखिल करने को कहा। कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने घटना से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की।

गोयल ने बताया कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कुल 10 शिकायतें प्राप्त हुईं हैं जिनकी विवेचना की जा रही है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हुए।

पुलिस कार्रवाई अन्यायपूर्ण और प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाओं में यह आरोप भी लगाया गया है कि घायल व्यक्तियों का सही ढंग से इलाज नहीं किया गया और अधिकारी प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट उनके परिजनों को उपलब्ध नहीं करा रही है।

एएमयू हिंसा मामले की सुनवाई 25 को

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर 17 फरवरी को सुनवाई टाल दी गई। कोर्ट ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग को जांच कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था। आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि अभी तक उन्हें आयोग की ओर से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख नियत कर दी है।

Loading...
लड़के/लड़कियों के फोटो देखकर पसंद करें फिर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

 

विज्ञापन