नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) की अंतिम सूची को नकारते हुए कोऑर्डिनेटर हितेश सरमा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय को बताया कि रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा अंतिम एनआरसी जारी किए जाना अभी बाकी है।

अदालत में दायर किए गए एक हलफनामें में हितेश शर्मा ने कहा कि एनआरसी की अंतिम सूची पर रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया ने फिलहाल कुछ नहीं कहा है। 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित सूची पर उन्होंने कहा कि वो एक “पूरक एनआरसी” थी और उसमें 4,700 नाम अयोग्य हैं।

असम में एनआरसी का अंतिम मसौदा पिछले साल 31 अगस्त को प्रकाशित किया गया था और 3,30,27,661 आवेदकों में से 3,11,21,004 व्यक्तियों को अंतिम एनआरसी सूची में शामिल करने के लिए योग्य पाया गया, जिसमें 19,06,657 व्यक्ति एनआरसी से बाहर रहे। जिसमें क़रीब 5.56 हिंदू और 11 लाख से ज़्यादा मुस्लिम शामिल थे।

एनआरसी स्टेट कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने एक प्रेस वार्ता में इसे “अंतिम एनआरसी” बताया था। हाल ही में असम सरकार ने अंतिम एनआरसी सूची में शामिल नामों के पुन: सत्यापन के लिए 15 प्रतिशत नामों को हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय से अनुमति मांगी।

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि “हम 15 प्रतिशत संशोधन की अनुमति देने के लिए शीर्ष अदालत से अनुमति मांग रहे हैं। हम धुबरी जिले के जोरहाट, शिवसागर जिले के लोगों और धुबरी जिले के लोगों का उपयोग करके जोरहाट, शिवसागर में इसका संचालन करना चाहते हैं।”

सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन एनआरसी राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने पूरी प्रक्रिया को गलत तरीके से संचालित किया था, यहां तक ​​कि सार्वजनिक धन की लूट का भी आरोप लगाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनका तबादला राज्य से बाहर कर दिया था।

मौजूदा एनआरसी संयोजक ने कहा कि उन्होंने एनआरसी सूची में हुई गड़बड़ की जानकारी रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया को दे दी है। फिलहाल आरजीआई की ओर से उन्हें कोई भी निर्देश नहीं मिले हैं। फिलहाल एनआरसी की अंतिम सूची कब तक जारी की जाएगी इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।