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नई दिल्ली | नोट बंदी के फैसले के बाद मोदी सरकार को विपक्ष के हमलो का सामना करना पड़ रहा है. नोट बंदी का फैसला लेते समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था की कालेधन , भ्रष्टाचार और आतंकवाद की रोकथाम के लिए नोट बंदी का फैसला लिया गया. लेकिन सरकार ने 2000 का नया नोट चलाने का फैसला किया है. अब विपक्ष मोदी सरकार से पूछ रहा है की 2000 के नए नोट से कालेधन पर कैसे लगाम लगेगी? इस सवाल का सरकार के पास फ़िलहाल को जवाब नही है.

आरएसएस के आर्थिक सलाहकार और विचारक एस गुरुमूर्ति ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा की अगले 5 सालो में 2000 का नोट भी बंद कर दिया जाएगा. सरकार इस नोट को इसलिए बाजार में लायी क्योकि नोट बंदी के बाद जो कैश की किल्लत होगी ,उसको दूर किया जा सके. गुरुमूर्ति के इस बयान के बाद 2000 के नोट के चलन और बंद होने के ऊपर बहस शुरू हो गयी. लोग पूछने लगे की जब बंद ही करना था तो चलाया क्यूँ.

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गुरुमूर्ति के बयान से संसय में आई सरकार ने इस बात का खंडन किया है. केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा की सरकार की 2000 के नोट को बंद करने की कोई मंशा नही है. और न ही इसके बारे में विचार किया गया है. गुरुमूर्ति के बयांन पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघवाल ने कहा की वो एक विचारक है, अर्थशास्त्री है, उनका यह निजी विचार हो सकता है लेकिन सरकार का नही.

मेघवाल के बयान के बाद एक बात तो साफ़ हो गयी की 2000 का नोट आगे भी चलन में रहेगा. वैसे आज नोट बंदी का 36वा दिन है. लेकिन बैंक और एटीएम के सामने से लाइन अभी भी ख़त्म या कम नही हुई है. लोग अभी भी घंटो लाइन में लगे रहते है. कुछ एटीएम थोड़ी देर बाद खाली हो जाते है तो कुछ एटीएम के शटर बंद पड़े हुए है. गाँव देहात के बैंक कैश की किल्लत से अभी भी झूझ रहे है. 50 दिन खत्म होने में केवल 15 दिन बचे है.

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