Tuesday, September 28, 2021

 

 

 

किसानों की 10 साल की ऋण माफी की तुलना में 2.41 लाख करोड़ के कॉरपोरेट लोन हुए राइट ऑफ

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केंद्र की मोदी सरकार के शासन में बीते तीन सालों में कॉरपोरेट सेक्टर के 2.4 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक कॉरपोरेट का ठंडे बस्ते (राइट ऑफ) में डाला गया 3 सालों को बैड लोन किसानों की 10 साल की ऋण माफी से भी ज्यादा है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक बीते 10 सालों में अलग-अलग राज्यों ने किसानों के 2.21 लाख करोड़ रुपये के करीब कर्ज माफ किए हैं। वहीं, सिर्फ तीन साल में कॉरपोरेट सेक्टर के 2.4 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।

अप्रैल 2018 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि आरबीआई के डाटा के मुताबिक पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने 2,41,911 करोड़ रुपये का कॉरपोरेट सेक्टर वाले बैड लोन खत्म कर दिए हैं। यह प्रक्रिया 2014-15 से लेकर 2017 के बीच पूरी की गई।

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ध्यान रहे किसानों के कर्ज माफी का हिस्सा एक साथ नहीं बल्कि 10 सालों के अंतराल में कई टुकडों में जारी किया गया। इसमें अलग-अलग राज्यों ने किसानों की स्थिति को देखते हुए लोन माफी का दायरा बढ़ाया या घटाया।  2008 में जहां राष्ट्रीय स्तर पर 52,260 करोड़ रुपये किसानों को माफ किए गए, वहीं राज्यों की बात करें तो 2014 में आंध्र के 24,000 और तेलंगाना के किसानों के 17000 करोड़ रुपये का ऋण माफ किया गया।

इसके बाद 2016 में तमिलनाडु ने 6000, 2017 में उत्तर प्रदेश ने 36,000, महाराष्ट्र ने 34,000 और पंजाब ने 10,000 करोड़ रुपेये की ऋण माफी की। 2018 में कर्नाटक ने 34,000 और राजस्थान ने 8000 करोड़ रुपये के ऋण माफ कर दिए।

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