नई दिल्ली | अभी हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावो ने सबको चौंकते हुए बेहद ही अप्रत्याशित परिणाम दिए. चौकाने वाले नतीजे आने के बाद हार का मुंह देखने वाली पार्टियों ने सारा ईवीएम् में गड़बड़ी की आशंकाए जाहिर की. हालाँकि चुनाव आयोग ने सभी आशंकाओ को ख़ारिज करते हुए कहा की ईवीएम् में छेड़छाड़ संभव नही है. लेकिन पिछले दिनों में हुई कुछ घटनाओ ने इन आशंकाओ को बल दे दिया है.

भिंड और रविवार को धौलपुर विधानसभा उप चुनाव के दौरान गड़बड़ी वाली ईवीएम् मिली है. मतदाताओ की शिकायत है की किसी भी पार्टी का बटन दबाने पर भी VVPAT मशीन से कमल की पर्ची निकल रही है. ऐसे खबरे मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने प्रेस वार्ता कर सभी मशीनो की जांच करने और आगामी चुनावो को मतपत्रो के जरिये कराने की मांग की है.

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इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को कांग्रेस सहित 16 विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. विपक्षी दलों ने आयोग से आग्रह किया की वो ईवीएम् छोड़ मतपत्रो के जरिये चुनाव कराये. बैठक के बाद बाहर निकले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पत्रकारों को बताया की चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की बात सुनी है और वो बहुत जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रहा है.

इससे पहले कांग्रेस नेता गुलाब नबी आजाद की अध्यक्षता में 16 विपक्षी दलों ने एक बैठक की. बैठक में ईवीएम् की गड़बड़ी के मुद्दे को एकजुट होकर चुनाव आयोग के समक्ष उठाने का फैसला किया गया. इस दौरान कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों ने आगामी चुनावो को VVPAT मशीन के साथ कराने की मांग की जबकि कांग्रेस का मानना है की सभी चुनाव मतपत्रो के जरिये कराये जाए.

चुनाव आयोग में जाने से पहले हुई बैठक में कांग्रेस के अलावा ,सपा, बसपा, कम्युनिस्ट, तृणमूल कांग्रेस , राजद, एनसीपी , जेडीयु आदि दल मौजूद रहे. हालाँकि ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस की मांग का समर्थन करते हुए मतपत्रो से चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा की अगर राजनितिक दलों को ईवीएम् से हो रहे चुनावो की विश्वसनीयता पर संदेह है तो वापिस मतपत्रों की तरह लौटने में कोई परेशानी नही है. आखिर ओल्ड इस गोल्ड जो होता है.

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