उत्तराखंड में चमोली जिले के रैणी गांव में रविवार को एक ग्लेशियर के टूटने से आई बाढ़ में मारे गए लोगों के अब तक 14 शव बरामद किए जा चुके है। इस तबाही के बाद से करीब 170 लोग लापता हैं। ग्लेशियर के टूटने के कारण 13.3 मेगावाट ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।

बाढ़ के समय 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा परियोजना और एनटीपीसी की 480 मेगावाट तपोवन—विष्णुगाड परियोजना में लगभग 176 मजदूर काम कर रहे थे। जिसकी पुष्टि मुख्यमंत्री रावत ने स्वयं की है। इनके अलावा, ऋषिगंगा परियोजना में डयूटी कर रहे दो पुलिसकर्मी भी लापता हैं। हालांकि, इन 176 मजदूरों में से कुछ लोग भाग कर बाहर आ गए।

इस आपदा से चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है। तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में 2978 करोड़, जबकि ऋषिगंगा परियोजना में 40 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा करीब 1000 करोड़ के अन्य नुकसान का अनुमान है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बचाव और राहत कार्य सरकार की पहली प्राथमिकता है, इसमें पूूरी क्षमता से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही फोन किया। उस समय वे हेलीकाप्टर में थे। हवाई सर्वे के बाद वे जिस समय लौट रहे थे, उस समय फिर फोन आया। प्रधानमंत्री ने हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया है। इसी तरह राष्ट्रपति ने भी फोन किया और हर तरह की मदद का आश्वासन दिया।

वहीं रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राहत एंव बचाव कार्य में भारतीय सशस्त्र बल जुट गए हैं। जोशीमठ में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जोशीमठ के रिंगी गांव में सेना के इंजीनियरिंग टास्क फोर्स का एक दल भी तैनात किया गया है। प्रभावित लोगों के बचाव के लिए सेना ने रविवार को चार कॉलम और दो मेडिकल टीमें तैनात की है।